जीवनसाथी तुम्हारे लिए.....❣️
मैं पागल सी लड़की
वो बहुत ही समझदार लड़का है
हाँ, यही वो शक़्स है
जो मुझपे अपनी जान छिड़कता है
मेरा उससे मिलना जैसे
कई जन्मों का रिश्ता लगता है
बातें वो अलबेली करता है
हर पल मेरा ध्यान वो रखता है
अचानक हम मृत्यु पर हैरान होते है क्योंकि लोग हमे बताए बग़ैर मर जाते हैं, वरना मृत्यु कोई अचंभे की बात नहीं, प्रेम में दूर जाना कोई बड़ी बात नही, जाने से पहले कोई बता दे कि वो जा रहा है तो जाना इतना भी भयावह नहीं है हम मृत्यु पर नहीं अचानक पर हैरान होते हैं...!!!
किसी को भूल जाना ही maturity नहीं होती,
कभी-कभी उसे याद रखते हुए भी अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ जाना असली maturity होती है।
और अगर किसी की याद आज भी दिल में इज़्ज़त और सुकून छोड़ जाए, तो वो सिर्फ आदत नहीं, सच्चा प्यार होता है। 😊
उदासी की छींटे पड़ी हैं
…रात यूँ ही काली नहीं है
सितारों ने बिखेरे हैं
चंद मुस्कुराहटों के रंग
मगर टिमटिमाहट उनकी
काफ़ी नहीं है
चाँद भी लेकर आया है
अपनी लालटेन
काले बादलों ने मगर
उसका दामन छोड़ा नहीं है
उदासी की छींटे पड़ी हैं
…रात यूँ ही काली नहीं है
स्त्रियां बहुत मजबूत होती हैं। यह बात सही है, लेकिन पूरी नहीं। वो मजबूत इसलिए बन जाती हैं, क्योंकि उनके पास कमजोर पड़ने की जगह नहीं होती। थक जाने के बाद भी वो अपने दर्द को जिम्मेदारियों के पीछे छुपा लेती हैं। बच्चे घर परिवार इन सबके बीच उनका अपना दुख कहीं जगह नहीं बना पाता।
असल कड़वा सच ये है कि कुछ पुरुष स्त्री को तब तक “त्याग की मूरत” कहते हैं जब तक वो उनकी इच्छा के अनुसार चले..और जैसे ही वो अपने आत्मसम्मान,परिवार या भविष्य को चुन ले ..उसे स्वार्थी, लालची और बेवफा घोषित कर देते हैं।
जिस लड़की ने अपने पिता का सम्मान,अपना भविष्य और घर की ज़िम्मेदारियाँ चुनीं, उसने कोई अपराध नहीं किया, उसने बस वो परिपक्वता दिखाई जो हर किसी में नहीं होती..प्रेम त्यागना आसान नहीं होता लेकिन हर त्याग बेवफाई नहीं कहलाता।
स्त्री कभी किसी एक पुरुष पर नहीं टिकी, उसके लिए प्रेम सींचने वाला पुरुष वासना, स्वार्थपूर्ति के लिए जुड़ता है और अपूर्ण होता है अंततः उसने प्रेम और भविष्य(धन)में भविष्य चुना और पापा के सम्मान की रक्षा करते हुए प्रेम त्याग दिया पर उसे त्याग की मूरत कहा गया...!!!
@nisprah स्त्री कभी किसी एक पुरुष पर नहीं टिकी...
यही सोच बताती है कि समस्या स्त्री में नहीं तुम्हारी नजर में है।जिस प्रेम को तुम 'वासना'कह रहे हो उसी प्रेम में पुरुष अपनी असफलता छुपाकर खुद को पीड़ित घोषित कर देता है।
@nisprah पहली लाइन में ही लिखा है कि पैसा रिश्तों को आसान बनाता है 😊
ज़रूरतें पूरी करने में उसकी बहुत बड़ी भूमिका है इसमें कोई शक नहीं...लेकिन सिर्फ पैसे से रिश्ता टिक जाए, ये हर बार सच नहीं होता...मुश्किल वक्त में साथ, भरोसा और अपनापन भी उतने ही ज़रूरी होते हैं।
मुझे अब मरने से डर लगने लगा है।
पहले मुझे कभी डर नहीं लगता था, लेकिन जब से मैं माँ बनी हूँ, यह डर मेरे भीतर गहराई से बस गया है। अब हर पल यही ख्याल आता है कि मेरे बाद मेरे बच्चे का क्या होगा… कौन उसे मेरी तरह प्यार करेगा?
@nisprah अगर सच में ऐसा होता तो पुरुष भी किसी भी स्त्री से प्रेम कर लेता बिना रंग,रूप और गुण देखे
पर हकीकत ये है कि पुरुष भी वहीं खिंचतें हैं जहाँ उनका मन आकर्षित होता है....
प्रेम को सिर्फ स्त्रियों की ‘खोज’ और पुरुषों की ‘सरलता’ तक सीमित करना थोड़ा oversimplified नहीं है?