*सूर्यास्त हो चुका है. अब कल संधि पूजा की तैयारी*
शक्ति की करो मौलिक कल्पना...
रवि हुआ अस्त;
रह गया राम-रावण का अपराजेय समर आज का,
इस निर्णायक समय में राम की शक्ति पूजा
नवरात्र में सन्धि पूजा काल
और ये क्या! एक सौ आठवां कमल पुष्प नहीं,
राम हो गए व्यथित
क्या पूजा पूर्ण नही हो पाएगी?
राम के मन के अंतर्द्वंद, संघर्ष, संशय
अंततः शक्ति चाहिए
शक्ति के बिना तो शिव भी शव के समान हैं
अभीष्ट है शक्ति...
चाहिए कि, की जाए शक्ति की मौलिक कल्पना
चाहे अवतारी राम हों या जन आम
अथवा मिथक का सम-सामयिक प्रत्यक्ष,
सर्वहारा कुकुरमुत्ता
सक्षम हो कर वो भी कह सके
अबे, सुन बे गुलाब,
भूल मत जो पाई खुशबू, रंगोआब
खून चूसा खाद का तूने अशिष्ट
डाल पर इतरा रहा कैपिटलिस्ट
-- अहंकार, असत्य और तामसी शक्तिओं के वर्चस्व को चुनौती देने हेतु आप सक्षम बने, विवेकशील बनें.
स्वयं देवी कहें 'होगी जय, होगी जय, हे पुरुषोत्तम नवीन!'
(महाप्राण निराला को स्मरण करते हुए, क्षमा पूर्वक)
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित विनयपत्रिका में संकलित भगवती देवी की दिव्य स्तुति।
जय जय जगजननी देवी सुर-नर-मुनि असुर सेवि।
भुक्ती-मुक्ति-दायिनि भय हरणी कालिका।
मंगल-मुद-सिद्धि-सदनि पर्वशर्वरीश-वदनि, ताप-तिमिर-तरुण-तरणि किरणमालिका ॥
वर्म, चर्म कर कृपाण, शूल-शेल धनुषबाण।
धरणि दलनि दानव दल रण करालिका।
पूतना-पिशाच-प्रेत डाकिनी-शाकिनि-समेत, भूत-ग्रह-बेताल-खग-मृगालि जालिका ॥
जय महेश-भामिनी, अनेक रूप-नामिनी।
समस्त लोक-स्वामिनी, हिमशैल बालिका।
रघुपति-पद परम प्रेम, तुलसी यह अचल नेम देह है प्रसन्न पाहि प्रणत-पालिका ॥
अपराजिता देवी ने महादेवजी से कहा- भगवन्! आप शुम्भ निशुम्भ के पास दूत बनकर जाइये!
और उन गर्वीले दानव शुम्भ एवं निशुम्भ से कहिये- ‘दैत्यो! यदि तुम जीवित रहना चाहते हो तो पाताल को लौट जाओ। इन्द्र को त्रिलोकी का राज्य मिल जाय और देवता यज्ञभाग का उपभोग करें!’
राम नाम गुन चरित सुहाए।
जनम करम अगनित श्रुति गाए॥
जथा अनंत राम भगवाना।
तथा कथा कीरति गुन नाना॥
वेदों ने श्री रामचन्द्रजी के सुंदर नाम, गुण, चरित्र, जन्म और कर्म सभी अनगिनत कहे हैं। जिस प्रकार भगवान श्री रामचन्द्रजी अनन्त हैं, उसी तरह उनकी कथा, कीर्ति और गुण भी अनंत हैं ❣️✨
किसी कला को जब #कलाकार प्रदर्शित करता तो उस #कला के पीछे बहुत सारे कलाकारों की मेहनत छुपी रहती है.... आप उदहारण के तौर पर इन चाचाजी को देख सकते हो...!!
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