सम्राट विक्रमादित्य परमार के सुशासन के प्रतीक पर्व विक्रमोत्सव (नववर्ष 2082 विक्रम संवत) एवं माँ शक्ति की आराधना के प्रथम दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।
@shri_kys@Shri_PF@rewantpatoda#weareskpf
@shauryasingh134@OliveGreens09@shri_kys आदरणीय शौर्य सिंह जी,हमारी व्यवस्था बरसों पुरानी थी इसमें सभी को न्याय और समानता का अधिकार था,पर
जब हमारे समाज का सामाजिक मानसिक पतन होने में पिछले 200 वर्ष लगे हैं और पतन अभी भी हो रहा है तो इस पतन को रोकने में और पुनः समाज का सामाजिक बौद्धिक और आर्थिक विकास करने में समय लगेगा🙏🏻
साधो रे! यह मुर्दों का गाँव
"ठाकुर का कुआं से शुरू हुए प्रयोग पद्मिनी का चरित्र हनन करते हुए अभी तो राणा सांगा के चरित्र हनन तक ही पहुँचे हैं, लेकिन हमारी सुषुप्ता को देखते लगता है ये रास्ता आगे महाराणा प्रताप, दुर्गादास होते हुए महाराव शेखा तक (यानी हर एक महापुरुष तक) भी पहुंचेगा । क्योंकि हम हर बार 5 दिन सोशल मीडिया पर लिखने के अलावा करते ही क्या हैं ? क्या हमारे पास इनसे निपटने की कोई रणनीति है ? क्या हमारा सामाजिक व राजनीतिक नेतृत्व यह समझ पाने में सक्षम नहीं कि कौमी स्वाभिमान का संरक्षण कैसे किया जाए ?
भरी सभा में गद्दार कहा गया है । ऐसा ही वाकया आगरा के राज दरबार में हुआ था जब सलावत खाँ ने भरी सभा में अमर सिंह राठौड़ (नागौर) को गँवार कहा था -
उण मुख ते गग्गो कहयो, इण कड लई कटार ।
वार कहन पायो नहीं, जमधर हो गई पार ।।
जो लोग गँवार तक सुन नहीं पाते थे उनके वंशज गद्दार तक सुन रहे हैं!"
-कुंवर अवधेश शेखावत
#Bundi#हिण्डोली: रामसागर झील मे नाव पलटने से जुडा मामला, लापता युवक का नहीं लगा सुराख़
सिविल डिफेन्स के देर रात चले सर्च अभियान के बावजूद पुलिस व प्रशासन के हाथ खाली, अल सुबह ग्रामीण अपने स्तर पर झील मे कर रहे तलाशी मौके पर ग्रामीणों की भीड़ मौजूद
#SachBedhadak
यह देश तुम्हारी कुर्बानियों के लायक नहीं था, मेरे पुरखों! जिस राज्य और प्रजा की रक्षा के लिए तुम फ़ना हुए, जिनके लिए तुम्हारे परिवार हँसते हँसते कुर्बान हो गए, आज उन्हीं की औलादें तुम्हें देश के सबसे ऊँचे पटल से कोसती हैं, धिक्कारती हैं। यह देश तुम्हारी कुर्बानियों के लायक नहीं था, मेरे पुरखों! ये प्रजा बचाने योग्य ही नहीं थी!
क्षत्रिय महापुरुषों के लगातार हो रहे अपमान व गौरवशाली इतिहास से साज़िशन खिलवाड़ के ख़िलाफ़ आख़िर क्यो अधिकतर हिंदूवादी संगठन सदेव चुप्पी साध लेते है ?
यह महापुरुष किसी जाति के लिए नहीं अपितु राष्ट्र और धर्म रक्षा के लिए लड़े और वीरगति को प्राप्त हुए। क्या आज़ाद भारत में इन शूरवीरों के सम्मान की रक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ़ राजपूत समाज के नेताओं और क्षत्रिय संघठन मात्र की है ??
आख़िर कब बोलेंगे राष्ट्रवाद का चोला ओढ़े हिंदूवादी संगठन ?
#RanaSanga