Chhatarpur Municipal Chairman Arvind Kumar Gupta met Nancy Sahay, Director of the Directorate of Municipal Administration (DMA), Jharkhand. During the meeting, he requested the Director to expedite the ongoing development projects in Chhatarpur. He also informed her about the shortage of manpower in the Chhatarpur Nagar Panchayat office.
The Director assured that this issue faced by the municipal bodies would be resolved soon.
छतरपुर पलामू में अनुमंडलीय अस्पताल द्वारा उपलब्ध कराया गया 108 एम्बुलेंस का चालक पेशेंट को मेदिनीनगर सदर हॉस्पिटल ले जाने के बजाए वीराने सड़क पर उतार कर भाग गया। यह निर्ममता है। कृप्या संज्ञान ले कर दोषियों पर कार्रवाई की कृपा करें।
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पलामू की एक पेशेंट की मौत पल्स अस्पताल में इलाज के दौरान हो गई है, परिवार बेहद गरीब है, जमीन बेचकर पचास हज़ार अस्पताल को दे चुका है, और नबे हज़ार के लिए पल्स हॉस्पिटल ने शव को अपने कब्जे में ले लिया है, कृपया मदद करें।
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राजस्थान के भरतपुर में XPO के नाम पर 3500 करोड़ का घोटाला हुआ है, जिसमें गिरफ्तारियां भी हुई है, झारखंड के छतरपुर इलाके से भी लगभग 50 करोड रुपए निवेशकों के इस ऐप में लगाए गए हैं, जांच कर कार्रवाई की आवश्यकता है। @SEBI_India@RBI@DC_Palamu@jhar_governor@JharkhandPolice
पलामू ज़िले के छतरपुर प्रखंड में संचालित कई CSP सेंटरों के द्वारा धांधली की जा रही है। ग्रामीण इलाके के लोगों तक सुविधा पंहुचाने के उद्देश्य से संचालित अधिकांश CSP सेंटर शहर से चलाए जा रहे हैं। संज्ञान लेने की जरूरत है। @HemantSorenJMM@DC_Palamu@TheOfficialSBI@OfficialSBICare
#एक_युवा_की_ज़िंदगी_खतरे_में_है#अपील
आदरणीय मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM
जी से मदद की गुहार
कमलेश कुमार यादव पिता श्री उपेन्द्र प्रसाद यादव ग्राम लेवाड़ मौनाहा पोस्ट नौडीहा खजुरी थाना छतरपुर जिला पलामू झारखंड 822113 का स्थायी निवासी हैं दोनों किडनी पूरी तरह से खराब हो गया है जिंदगी और मौत से जूझ रहा ईलाज CMC HOSPITAL VELLORE,TAMILNADU से चल रहा है। किडनी Transplant करवाने में 15-20 लाख रूपये लग रहा है। इनके पापा के आय का स्रोत कुछ भी नहीं है और बड़े भाई एक मजदूर हैं इसलिए पैसा नहीं होने के कारण मैं Kidney Transplant करवाने में असमर्थ आप सभी से विनम्र निवेदन है
@IrfanAnsariMLA
मदद करने कि किरपा करे
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झारखंड के डीजीपी साहब ने पिछले साल ही सभी एसपी को निर्देशित किया था कि वे थानों को निर्देशित करें की वे रिसीविंग जरूर दें, लेकिन छतरपुर में खुलेआम इसकी धज्जियां उड़ाई जा रही है, नतीजन आवेदक अपने आवेदन की फॉलोअप नहीं ले पाते हैं।
छतरपुर कस्तूरबा विद्यालय में मर्ज कर 10 सालों चलाया जा रहा है नौडीहा बाजार का झारखंड बालिका आवसीय विद्यालय
नौडीहा बाजार से 15 किमी की दूर अपना भवन नहीं होने से छात्राओं को होती है भारी परेशानी
आठ सालों में भी नहीं बन सका नौडिहा बाज़ार में चार करोड़ का झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय का भवन
छतरपुर: पलामू ज़िले के छतरपुर में में शिक्षण व्यस्था का अजब हाल है, 10 सालों से राज्य सरकार द्वारा संचालित झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय छतरपुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में मर्ज कर चलाया जा रहा है। नतीजन ग्रामीण इलाके की दूरस्थ गांवों की छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अपना भवन नहीं होने से छात्राएं किसी तरह छतरपुर स्थित कस्तूरबा विद्यालय में पढ़ने को विवश हैं, जहां पहले से ही सकैडो छात्राएं अध्ययनरत हैं। मिली विभागीय जानकारी के अनुसार झारखंड आवासीय बालिका विद्यालय में 350 बच्चों को हर साल साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा जाता है। अपने स्थापना काल से ही यह विद्यालय छतरपुर के कस्तूरबा विद्यालय में रामभरोसे चल रहा है, जबकि विद्यालय चलाने हेतु प्रतिवर्ष करोड़ों का आवंटन उस विद्यालय को प्राप्त होता है। विभागीय जानकारी के अनुसार झारखंड आवासीय बालिका विद्यालय में नियमानुसार नौ शिक्षक, एक लेखापाल, तीन कुक, दो गार्ड और तीन स्वीपर की आवश्यकता है, साथ ही उसे अपने भवन की भी दरकार है दुर्भाग्य ये है कि आज एक दशक के बाद भी इस विद्यालय को अपना भवन नसीब नहीं हुआ है। जबकि आठ साल पूर्व नौडिहा बाज़ार इलाके में तत्कालीन विधायक और वर्तमान वित्तमंत्री की मदद से चार करोड़ का भवन स्वीकृत हुआ है जो संवेदकों की लापरवाही से आधा अधूरा रह गया। वहीं कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय छतरपुर की बात करें तो इस विद्यालय में 525 बच्चों का स्टेन्थ हैं, जहां फिलहाल लगभग 480 छात्राओं का नामांकन दर्शाया गया है और वे वहां अध्ययनरत हैं। अगर यहां यूनिट के हिसाब से सृजित पदों की बात करें तो यहां फुलटाइमर शिक्षक पांच, पार्टटाइमर ग्यारह, रसोइया तीन, गार्ड एक और स्वीपर मात्र एक है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां दूरस्थ ग्रामीण इलाकों से आई छात्राएं कैसे शिक्षा ग्रहण करती होंगी और उन्हें किस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता ह्योग।
इस मामले पर बात करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अरविन्द गुप्ता चुनमून ने कहा कि प्राथमिकता के आधार पर विद्यालय को अलग कर देना चाहिए, इलाका गरीब है गरीब घरों की छात्राओं को ज्यादा परेशानी होती है, नौडीहा बाज़ार में विद्यालय बन जाने से छात्राओं को आसानी होती। उन्होंने मुख्यमंत्री, वित्तमंत्री और पलामू डीसी से मांग किया है कि वे इस मसलव कि गम्भीरता समझते हुए विद्यालय के भवन के निर्माण करवाएं। बरहाल वहीं लोग बताते हैं कि अगर नौडीहा बाजार के लिए सन्चालित झारखंड आवासीय बालिका विद्यालय को अलग कर उसे नौडीहा बाजार स्थित दूसरे भवन में संचालित कर देने से छात्राओं को भारी परेशानी से बचाया जा सकता है। हालांकि कई दफा इसकी जानकारी पलामू डीसी और सबंधित विभाग के आलाधिकारियों को भी दी जा चुकी है लेकिन इस समस्या के समाधान के दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।
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पलामू में कस्तूरबा स्कूलों का हाल बेहाल है, कई मर्ज कर चलाये जा रहे हैं, खास कर छतरपुर कस्तूरबा का हाल ज़्यादा खराब है, नौडिहाबाज़ार कस्तूरबा को छतरपुर में मर्ज कर चलाया जा रहा है,साथ ही कई शिक्षक 3 सालों से जमे हुए हैं।
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आदरणीय मुख्यमंत्री@HemantSorenJMM महोदय जी
पलामू छतरपुर नगर पंचायत के ठेकेदारों ने High school को भ्रष्टाचार और लूट का मैदान बना दिया है कभी open Gym के नाम पर की भरावट के नाम पर तो किसी अन्य योजना के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च हो चुके
@DC_Palamu महोदया मामले में संज्ञान ले 🙏