"लोकतंत्र केवल सरकार का एक रूप नहीं है। यह मुख्य रूप से सहचारी जीवन (associated living) का एक तरीका है, जो संयुक्त और साझा अनुभवों पर आधारित है। यह मूल रूप से साथी इंसानों के प्रति सम्मान और श्रद्धा का दृष्टिकोण है।"
डॉ. भीम राव अम्बेडकर
Isincerely thank the CISF team at Jammu Airport for their prompt support and professionalism in helping me recover my lost bracelet.Special thanks to Mr.Dharam Singh Meena for his honesty & kind assistance.This experience has truly strengthened my respect & trust in CISF services
Precision in Every Step, Securing the Nation — Vote for CISF Marching Contingent
CISF marched with unmatched excellence at the 77th Republic Day Parade, showcasing unity and dedication to the nation.
We invite all citizens to support and vote for CISF through the official voting link. Your vote is a tribute to the hard work, commitmentand pride of CISF personnel. Let us come together to recognize their excellence and celebrate the true spirit of national pride.
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and send SMS to 7738299899
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Voting Link:
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#VoteForCISF #BestMarchingContingent #CISFPride #MarchingWithHonor #ShieldOfSecurity #NationFirst #CISFExcellence #RepublicDay2026
@HMOIndia@mygovindia@PIB_India@DDNewslive@CISFTraining
It is a matter of immense pride that today, on Constitution Day, a bust of Dr. Babasaheb Ambedkar was unveiled at the UNESCO Headquarters in Paris. This is a fitting tribute to Dr. Ambedkar and his role in the making of our Constitution. His thoughts and ideals give strength and hope to innumerable people.
@UNESCO@IndiaatUNESCO
"I feel that the #Constitution is workable; it is flexible and it is strong enough to hold the country together both in peace time and in war time. Indeed, if I may say so, if things go wrong under the new constitution the reason will not be that we had a bad Constitution. What we will have to say is that Man was vile."
Dr. B.R. #Ambedkar on the Constitution.
Our Constitution has withstand, hold together the country both in peace and war time, rebuilding the Indian Society on the cardinal principal of humanity: Equality, Liberty and Fraternity deeply rooted in the Indian Culture. Let's celebrate our Constitution and imbibe the Constitutional Morality as envisaged by the great Man.
Wishing all #ConstituionDay.
@RohtasB@kunalrgautam@ThePSFront@praveenrpal82@praveenrpal82
#संविधान_दिवस
In service of people, #CISF Unit ASG Jammu organized a relief distribution drive at Village Chak Jarala, Bishnah (J&K) on 04.09.2025 for families affected by recent floods.
Essential food packets—rice, dal, sugar, oil, salt, potatoes, soaps & spices—were distributed to ease their immediate hardships.
The initiative was conducted in presence of members from local administrative bodies and was made possible through voluntary contributions by Sanrakshika members & CISF personnel.
The humanitarian effort was warmly appreciated by the villagers & local administration.
#FloodRelief #reliefoperation #humanitarianassistance #JammuAndKashmir #ServingNation #nationfirst #ShieldOfSecurity #support
@HMOIndia@PIB_India@mygovindia
Had an amazing experience at Jammu airport - forgot my laptop at security and the security proactively found me and handed it over to me. Saved me a great deal of trouble. Thanks to CISF and Staff at Jammu airport. Special thanks to Inspector AK Yadav Sir!
22 जुलाई 1947 के दिन ही बाबा साहेब डॉ भीम राव आंबेडकर जी संविधान सभा में पुन: चुनकर आये जिन्होंने ड्राफ्टिंग समिति के चेयरमैन रहते हुए संविधान निर्माण में महत��त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके योगदान के कारण ही उन्हें संविधान निर्माता भी कहा जाता है।
हमारा राष्ट्रीय ध्वज, तिरंगा, तीन रंगों—केसरी, सफेद और हरे का प्रतीक है, जिसमें बीच में नीले रंग का अशोक चक्र होता है। यह ध्वज भारतीय स्वतंत्रता, एकता और गौरव का प्रतीक है। राष्ट्रीय तिरंगे को 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा द्वारा आधिकारिक रूप से अपनाया गया।
इस दिन, संविधान सभा की बैठक में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने ध्वज को प्रस्तुत किया और इसे स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय ध्वज बनाए जाने का प्रस्ताव रखा। यह ध्वज स्वराज ध्वज पर आध��रित था, जिसे 1931 में पिंगली वेंकैया ने डिज़ाइन किया था
तिरंगे के तीन रंगों का महत्व इस प्रकार है:
केसरी: साहस और बलिदान का प्रतीक।
सफेद: शांति और सत्य का प्रतीक।
हरा: समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक।
अशोक चक्र: नीले रंग में 24 तीलियों वाला चक्र, जो धर्म और प्रगति का प्रतीक है।
संविधान सभा ने तिरंगे को स्वीकार करते हुए इसे स्वतंत्र भारत की पहचान के रूप में स्थापित किया। यह ध्वज 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ पहली बार आधिकारिक रूप से फहराया गया। तिरंगा न केवल एक ध्वज है, बल्कि यह भारतीयों के स्वतंत्रता संग्राम, एकता और विविधता में एकता के आदर्शों को दर्शाता है। राष्ट्रीय तिरंगा भारत के गौरवशाली इतिहास और इसके लोगों की आकांक्षाओं का प्रतीक है। संविधान सभा द्वारा इसका स्वीकरण एक ऐतिहासिक क्षण था, जो भारत के स्वतंत्र राष���ट्र के रूप में उदय का प्रतीक बना।
#tiranga #NationalFlagDay #nationalflag #NationalFlagAdoptionDay #Ambedkar
@ThePSFront @praveenrpal82 @praveen86549 @NimSahab @shivammilind01
डॉ. बी.आर. अम्बेडकर का शिक्षा दर्शन #सामाजिक_न्याय, #समानता और #मानव_गरिमा के सिद्धांतों पर आधारित था। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन और दलित-उत्पीड़ित वर्गों के उत्थान का सबसे शक्तिशाली साधन माना। उनका मानना था कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का साधन नहीं, बल्कि यह व्यक्ति को आत्म-सम्मान, स्वतंत्रता और सामाजिक बदलाव का आधार प्रदान करती है। अम्बेडकर का शिक्षा दर्शन प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक सम��्र और समावेशी था।
प्राथमिक शिक्षा: डॉ. अम्बेडकर का मानना था कि प्राथमिक शिक्षा सभी के लिए सुलभ और अनिवार्य होनी चाहिए क्योंकि यह मानव विकास की नींव है। उन्होंने शिक्षा को मौलिक अधिकार के रूप में देखा और इसे सामाजिक असमानता को कम करने का पहला कदम माना। उनके अनुसार, प्राथमिक शिक्षा में बच्चों को न केवल साक्षरता और गणितीय ज्ञान देना चाहिए, बल्कि उन्हें सामाजिक समानता, नैतिकता और आत्मविश्वास की भावना भी विकसित करनी चाहिए। 1927 में, महाड सत्याग्रह के दौरान अपने भाषण में, अम्बेडकर ने कहा, “शिक्षा वह हथियार है जो हमें गुलामी की जंजीरों से मुक्त कर सकता है।” उन्होंने जोर देकर कहा क��� प्राथमिक शिक्षा सभी वर्गों, विशेषकर दलितों और शोषित समुदायों के लिए सुलभ होनी चाहिए।
प्राथमिक शिक्षा को मुफ्त और अनिवार्य बनाने की वकालत करते हुए, अम्बेडकर ने 1942 में अपने लेख ‘Annihilation of Caste’ में उल्लेख किया कि शिक्षा के बिना सामाजिक सुधार असंभव है। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा में जातिगत भेदभाव को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया।
माध्यमिक शिक्षा के स्तर पर, अम्बेडकर ने व्यावहारिक और वैज्ञानिक शिक्षा पर जोर दिया। उनका मानना था कि ��स स्तर पर शिक्षा को विद्यार्थियों को नौकरी और स्व-रोजगार के लिए तैयार करना चाहिए। साथ ही, यह सामाजिक चेतना और नेतृत्व की भावना को विकसित करने में मदद करे। 1943 में पीपल्स एजुकेशन सोसाइटी की स्थापना करते समय, अम्बेडकर ने अपने भाषण में कहा, “शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को समाज में बदलाव लाने वाला बनाना चाहिए।” इस सोसाइटी के माध्यम से उन्होंने दलित और पिछड़े ��ात्रों के लिए स्कूल और कॉलेज स्थापित किए।
माध्यमिक शिक्षा में तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा को शामिल करने की वकालत की ताकि विद्यार्थी आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन सकें। उन्होंने 1950 में सिद्धार्थ कॉलेज, मुंबई की स्थापना के दौरान इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा को सामाजिक और आर्थिक गतिशीलता का साधन बनना चाहिए।
उच्च शिक्षा के बारे में अम्बेडकर का दृष्टिकोण बहुत प्रगतिशील था। उन्होंने उच्च शिक्��ा को सामाजिक परिवर्तन और बौद्धिक नेतृत्व विकसित करने का माध्यम माना। उनके अनुसार, उच्च शिक्षा केवल विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए, ��िशेषकर उन समुदायों के लिए जो ऐतिहासिक रूप से वंचित रहे हैं। 1956 में अपने भाषण ‘Buddha or Karl Marx’ में, अम्बेडकर ने कहा, “शिक्षित व्यक्ति ही समाज को बदल सकता है। उच्च शिक्षा हमें तर्क, विज्ञान और समानता की भावना देती है।” उन्होंने उच्च शिक्षा को सामाजिक सुधार और बौद्धिक स्वतंत्रता का आधार माना।
अम्बेडकर ने उच्च शिक्षा में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तार्किक चिंतन को बढ़ावा देने की वकालत की। उन्होंने दलि��� और पिछड़े वर्गों के लिए छात्रवृत्ति और शैक्षिक अवसरों की मांग की। उनकी पुस्तक ‘Who Were the Shudras?’ और ‘The Untouchables’ में उन्होंने ऐतिहासिक और सामाजिक विश्लेषण के माध्यम से शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया।
शिक्षा दर्शन के मुख्य सिद्धांत:
समानता और समावेशिता: अम्बेडकर ने शिक्षा को जाति, वर्ग और लिंग के भेदभाव से मुक्त करने की वकालत की। उनका मानना था कि शिक्षा सभी के लिए समान रूप से सुलभ होनी चाहिए।
आत्म-सम्मान और स्वतंत्रता: शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति को आत्मनिर्भर और आत्म-सम्मानी बनाना है। उन्होंने 1945 में अपने एक भाषण में कहा, “शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो इसे पिएगा, वह दहाड़ेगा।”
वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण: अम्बेडकर ने शिक्षा में तर्क और विज्ञान को प्राथमिकता दी। उन्होंने ��ौद्ध दर्शन को अपनाते हुए तर्कसंगत और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दिया।
सामाजिक परिवर्तन का साधन: शिक्षा को सामाजिक सुधार और उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष का हथियार माना। ‘Annihilation of Caste’ में उन्होंने लिखा, “शिक्षा के बिना समाज में कोई क्रांति संभव नहीं है।”
डॉ. अम्बेडकर का शिक्षा दर्शन प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक सामाजिक समानता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानव गरिमा पर आधारित था। उन्होंने शिक्षा को न के��ल व्यक्तिगत विकास का साधन माना, बल्कि इसे सामाजिक और आर्थिक उत्थान का आधार भी बनाया। उनके द्वारा लिखित साहित्य, उनकी स्थापित पीपल्स एजुकेशन सोसाइटी और सिद्धार्थ कॉलेज जैसे संस्थान उनके दृष्टिकोण को मूर्त रूप देने का प्रयास थे।
#Ambedkar #education #equality
@ThePSFront @NimSahab @praveenrpal82 @praveen86549
Encounter between terrorists and SOG Team of Jammu Kashmir police with Army in Kishtwar, Contact established with hidding terrorists in Dachchan area of Kishtwar @AmitShah@OfficeOfLGJandK@SSPKishtwar@JmuKmrPolice
#StrongAndCapable
Saluting Our Bravehearts!
#TigerDivision celebrated the Diamond Jubilee of its valiant role in the victorious #1965IndoPakWar by paying homage at the Maj Gen Atma Singh Memorial.
A tribute to the indomitable valour and eternal sacrifice that continue to inspire the nation.
@adgpi@WesternComd_IA