भाजपा ने अपने राष्ट्रीय अधिवेशन में 400 पार का नारा दिया है।
लेकिन हक़ीकत ये है उन्हें जीतने का विश्वास नहीं है। तभी तो वे हर प्रदेश में कांग्रेस को तोड़ने में लगे हैं।
अगर जीतने की स्थिति में होते तो ये सब क्यों करते? वे जानते हैं कि जीतना आसान नहीं है।
भारत में विशेष स्कूल के लिए शिक्षक-छात्र अनुपात के मानक जारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम 2016 की धारा-79 के तहत नियुक्त राज्य आयुक्तों को निर्देश दिया था कि वे अनुपालन के संबंध में स्वत जांच शुरू करें और फिर उपयुक्त प्राधिकारी को सिफारिश करें जो आवश्यक हो
इस तरह के बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों के लिए अलग से मानक होने चाहिए क्योंकि ये शिक्षक ही देश में सामान्य स्कूलों में पढ़ने वाले विशेष जरूरत वाले बच्चों को शिक्षा और प्रशिक्षण दे सकते हैं
वर्ष 2019 में की गई सिफारिशों में कहा गया है कि एक विशेष दिव्यांगता में विशेष शिक्षा शिक्षकों की संख्या 'सेरेब्रल पाल्सी' से ग्रस्त बच्चों के लिए आमतौर पर स्वीकृत छात्र-शिक्षक अनुपात 8:1 के आधार पर निर्धारित की जानी चाहिए सेरेब्रल पाल्सी एक 'न्यूरोलाजिकल डिसआर्डर' होता है जिसमें बच्चों की शारीरिक गति, चलने-फिरने की क्षमता प्रभावित होती है
पीठ ने 100 पृष्ठ के अपने फैसले में कहा था कि नियमित आधार पर नियुक्त किए जाने वाले पुनर्वास पेशेवरों/विशेष शिक्षकों के लिए इस प्रकार सृजित पदों के लिए रिक्तियों को भरने की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाए और इसे आज से छह महीने के भीतर या शैक्षणिक वर्ष 2022-2023 के शुरू होने से पहले पूरा किया जाए पीठ ने कहा कि पुनर्वास पेशेवरों/विशेष प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए प्रशिक्षण स्कूलों या संस्थानों को संख्या बढ़ाने के लिए कदम उठाने चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने कहा यह भी कहा था कि पुनर्वास पेशेवरों या विशेष शिक्षकों की कमी है जो अकेले दिव्यांग लोगों या विशेष जरूरत वाले बच्चों को शिक्षा और प्रशिक्षण प्रदान कर सकते हैं और भारतीय पुनर्वास परिषद से पंजीकृत हैं शीर्ष अदालत ने इस बात पर संज्ञान लिया था कि इस असमानता पर राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को ध्यान देना होगा उसने कहा कि 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार देश में दिव्यांगों की संख्या कुल आबादी का लगभग 2.21 प्रतिशत है।
अब सवाल यह हैं कि क्या केंद्र या राज्य सरकार दिव्यांग बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दें पा रहा?
क्या पूरे देश में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गये निर्णय पर अमल हो पाया?
@PMOIndia@narendramodi@bhupeshbaghel@ChhattisgarhCMO
छत्तीसगढ़ के उप-मुख्यमंत्री के रूप में मुझे राज्य की सेवा करने का अवसर देने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन @kharge जी और श्रीमती सोनिया गांधी जी का हार्दिक आभार। मुझ पर निरंतर विश्वास के लिए श्री @RahulGandhi जी को भी धन्यवाद देना चाहता हूं।
मैं छत्तीसगढ़ के लोगों से मिले प्यार, विश्वास और राज्य के सर्वोच्च हित के लिए काम करते रहने के प्रोत्साहन के लिए उनका बहुत आभारी हूं।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @bhupeshbaghel जी और कांग्रेस पार्टी के सभी सहयोगियों के साथ, हम छत्तीसगढ़ को प्रगति और विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
अवश्य मेरे भाई बिल्कुल शामिल करेंगे🙏- मैं जानता हूँ सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के बावजूद प्रदेश में आप लोग़ो को अधिकार नही मिला खुले तौर पर नज़रअंदाज़ किया गया।@GargiPa23030485 @Hs_spe_Edu
विशेष शिक्षक की भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करें ताकि उन्हें भी बेहतर शिक्षा बेहतर जीवन का अवसर मिल सके।
छत्तीसगढ़ के 6 लाख दिव्यांग विद्यार्थियों को समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए पहल विशेष शिक्षक से ही हो सकता है
@RahulGandhi@priyankagandhi@bhupeshbaghel@ChhattisgarhCMO