ना जाने कितने ऐसे सफल कैंडिडेट है जो बहुत गरीब घर से आते है । किसी तरह मजदूरी करके तो दुकान,ठेला चला के उनके माता- पिता ने पढ़ाया और आज उस काबिल बने तो लोगों को अच्छा नहीं लग रहा झारखंडी -मूलवासी का हुआ तो बाहर से आये कोचिंग माफ़िया को पच नहीं रहा ।
कैमरे के सामने एक बुजुर्ग महिला (संजीत की माँ) चेहरे पर उम्र की लकीरें, लेकिन आंखों में आज भी उम्मीद। वहीं दूसरी ओर संजीत (ASO), जो अपने भविष्य और अपने अधिकारों को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।
मैं आप लोगों से पूछना चाहता हूँ, क्या एक लड़का जिसके सिर से पिता का साया तक नहीं है। अपने परिवार को 10 वर्ष के उम्र से पाल रहा है, उसपर 35-40 लाख दे कर नौकरी पाना कितना सही कितना गलत।
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