Modi Sold IDBI Bank
Modi Sold Air India
Modi Sold NINL
Modi Sold CEL
Modi Sold Ports
Modi Sold Airports
Modi Sold Telecom
But Trust me Dosto "में देश नहीं बिकने दूंगा"
“मैं देश नहीं बिकने दूँगा!” 🇮🇳
2014 का नारा याद है, मोदी जी?
आज आपकी सरकार ने IDBI Bank की 60.72% हिस्सेदारी ₹52,878 करोड़ में बेचने की मंज़ूरी दे दी। 🏦
विडंबना देखिए—जिस देश को न बिकने देने का वादा था, वहाँ अब देश की सार्वजनिक संपत्तियों का निजीकरण हो रहा है!
सवाल सिर्फ IDBI का नहीं, उस वादे और आज के फैसले के बीच के अंतर का है।
देश नहीं बिकने देंगे या देश की संपत्तियाँ बेचकर ही दम लेंगे? 🤔
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राष्ट्रवादी सरकार के मुखिया पीएम मोदी के नेतृत्व में वित्त मंत्री निर्माला सीतारमण ने देश का बैंक IDBI को 53 हजार करोड़ में बेंच दिया है। एयर इंडिया के बाद ये दूसरी बड़ी कंपनी है जिसे बेंचा गया है। इसबार कनाडा की कंपनी को 61 फीसदी शेयर बेंच दिया गया। पहले ये शेयर LIC के पास था।..
Fraands, महामानव जी ने एक और बैंक बेच दिया!
अब भाजपाई आएँगे और इसके 10 फायदे गिनाएँगे। हो सकता है, दीये जलाने का कार्यक्रम भी करवा दिया जाए।
एक अनपढ़ प्रधानमंत्री देश पर कितना बड़ा बोझ बन सकता है, यह देश के सामने है।
कभी नारा था “देश नहीं बिकने दूँगा”,
आज तंज है “एक-एक करके सब बेच दूँगा ”
वीडियो में मैडम की बात को ही देख लीजिए, IDBI बैंक की 60.72% हिस्सेदारी ₹52,878 करोड़ में कनाडा की Fairfax को बेचने की मंज़ूरी मिल गई।
जो खुद को 56 इंची सीने वाला बताकर सत्ता में आए, उनके राज में सरकारी संपत्तियाँ निजी हाथों में जा रही हैं, आख़िर आत्मनिर्भरता का यही मतलब था?
बैंक, कंपनियाँ और सार्वजनिक संपत्तियाँ यूँ ही बिकती रहीं, तो कल जनता के हिस्से में सिर्फ़ महँगाई और निजीकरण बचेगा, देश चलाना है या सेल लगानी है?
मोदी सरकार
बैंक नहीं चला सकती
स्कूल नहीं चला सकती
कॉलेज नहीं चला सकती
अस्पताल नहीं चला सकती
बिजली विभाग नहीं चला सकती
हवाई जहाज नहीं चला सकती
एयरपोर्ट नहीं चला सकती
पोर्ट नहीं चला सकती
रेलवे स्टेशन नहीं चला सकती
बस लच्छेदार भाषण सुना सकती है🙏
मोदी जी, सार्वजनिक संस्थानों पर आपके पुराने बयान याद हैं?🔥
2024 में आपने कांग्रेस और UPA पर BSNL, MTNL, HAL और Air India को बर्बाद करने के आरोप लगाए थे।
लेकिन अब ज़रा IDBI Bank के आँकड़े भी देखए! 👇
📈 वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक ने ₹9,513 करोड़ का शुद्ध मुनाफा कमाया—पिछले वर्ष से 27% अधिक।
✅ Gross NPA 2.98% से घटकर 2.32% पर आया।
इसके बावजूद आपकी सरकार ने बैंक की 60.72% हिस्सेदारी ₹52,878 करोड़ में बेचने की मंज़ूरी दे दी।
❓ जब बैंक का मुनाफा बढ़ रहा है और उसकी वित्तीय स्थिति सुधर रही है, तो बहुमत नियंत्रण निजी हाथों में सौंपना ही बेहतर विकल्प क्यों है?
❓ क्या बेहतर प्रबंधन, जवाबदेही और सुधारों के ज़रिये बैंक को सार्वजनिक क्षेत्र में और मज़बूत करने के विकल्पों का पर्याप्त आकलन हुआ?
सार्वजनिक संस्थानों की विफलता पर सवाल उठाना सही है, तो उनके सुधार के बाद भी निजीकरण की ज़रूरत पर सवाल उठाना गलत कैसे? 🤔
देश को सिर्फ बिक्री की कीमत नहीं, इस फैसले के पीछे का ठोस तर्क भी जानना चाहिए!
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