🚨 सोनभद्र: बिल्ली मारकुंडी में पीएम आवास योजना पर गंभीर सवाल!
ग्राम पंचायत बिल्ली मारकुंडी में प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी चयन और जियो-टैगिंग को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत मित्र, ग्राम प्रधान और कुछ ग्राम पंचायत सदस्यों की म��लीभगत से अपात्र लोगों के नाम सूची में शामिल किए गए, जबकि वास्तविक गरीब और पात्र परिवार आज भी योजना से वंचित हैं।
आरोप यह भी है कि जिन लोगों के पास चार पहिया वाहन, 4–5 बीघा या उससे अधिक कृषि भूमि, पहले से पक्के मकान हैं और जो आर्थिक रूप से संपन्न जीवन जी रहे हैं, उनके नाम भी लाभार्थी सूची में शामिल किए गए। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि क्या ऐसे लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाना नियमों के अनुरूप है?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि क्या किसी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन किया? यदि नहीं, तो बिना निष्पक्ष जांच के धनराशि जारी करना पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
ग्रामीणों की मांग है कि लाभार्थी सूची, जियो-टैगिंग और पात्रता की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। ��दि किसी अधिकारी, कर्मचारी, पंचायत प्रतिनिधि या अन्य व्यक्ति की भूमिका अनियमितता में सामने आती है, तो उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं—क्या निष्पक्ष जांच होगी या फिर गरीबों के हक पर उठ रहे सवाल यूं ही दबा दिए जाएंगे?@myogioffice @UPGovt @CdoSonbhadra @MoRD_GoI
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🚨 Sonbhadra News
खैरटिया में खनन पर बवाल, ग्रामीणों का आरोप—धमाकों ने छीन ली चैन की जिंदगी।
ओबरा तहसील के खैरटिया गांव में ��े० डी.एस. इंटरप्राइजेज की खदान को लेकर लगातार गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ब्लास्टिंग से पत्थर घरों तक पहुंच रहे हैं, खेतों की बोरिंग उखाड़ दी गई, पानी का संकट गहरा गया और आदिवासी परिवार दहशत में जीने को मजबूर हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आबादी के बीच खनन की अनुमति है?
क्या बिना चौपाल और जनसुनवाई के खदान का संचालन नियमों के तहत किया गया?
ग्रामीणों के आरोप बेहद गंभीर हैं— ���� न तो CCTV कैमरे लगाए गए हैं।
👉 न ही नाप-तौल (वेट ब्रिज) मशीन दिखाई देती है।
👉 रिहायशी इलाके से लगातार ओवरलोड टीपर दौड़ रहे हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
👉 रातभर कंप्रेसर मशीनें चलती रहती हैं। क्या रात में खनन की अनुमति है, या फिर अपने ही नियम-कानून चल रहे हैं?
ग्रामीणों का दावा है कि खनन क्षेत्र में ��्लास्टिंग से घरों तक पत्थर पहुंच रहे हैं, एक गाय घायल हो चुकी है और खेती की बोरिंग तक उखाड़ दी गई। महिलाओं का आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें धमकियां दी जा रही हैं।
खैरटिया में जब से खदान शुरू हुई है, तब से लगातार विरोध, धरना, प्रदर्शन और नए-नए विवाद सामने आ रहे हैं। आखिर जिम्मेदार अधिकारी अब तक मौन क्यों हैं?
बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र पहले भी कई गंभीर हादसों का गवाह रहा है। ग्रामीणों का कहना ���ै कि क्या प्रशासन किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
मुख्यमंत्री जी से मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और आबादी के बीच हो रहे खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए।बिल्लीमारकुण्डी क्षेत्र के खैरटिया गाँव में स्वीकृत खनन पट्टों पर कथित रूप से नियमों की अनदेखी कर खनन कार्य किए जाने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। ग्रामी��ों का कहना है कि खदान की दूरी आबादी से अत्यंत कम है, जिससे उनके मकानों एवं जान-माल पर लगातार खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार पट्ट��दार श्री देवेन्द्र नाथ दूबे, श्री पंकज दूबे, श्री ओमकार नाथ दूबे, श्री श्रीकान्त दूबे, श्री रुपेश दत्त दूबे, श्रीमती समोधिया एवं श्रीमती शान्ती देवी के नाम स्वीकृत खनन पट्टों पर कई दिनों से खनन कार्य चल रहा है। आरोप है कि अब खननकर्ता जबरन ब्लास्टिंग (विस्फोट) करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं, जिससे आसपास रहने वाले लोगों में भय का वातावरण है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि आबादी के समीप ब्लास्टिंग की जाती है तो मकानों में दरारें आने, भवनों को क्षति पहुँचने तथा किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उनका आरोप है कि संबंधित नियमों के अनुसार आबादी एवं मकानों की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना इस प्रकार की गतिविधियाँ नहीं की जानी चाहिए।
खनन कार्य के दौरान पर्यावरणीय एवं सुरक्षा मानकों का पालन, सुरक्षित दूरी बनाए रखना तथा विस्फोटक सामग्री के उपयोग संबंधी सभी वैध���निक प्रावधानों का अनुपालन आवश्यक है। ग्रामीणों ने प्रशासन एवं खनन ��िभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई करने तथा जनहित में सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित खनन संचालकों एवं जिम्मेदार अधिकारियों की होगी।
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लखनऊ
➡ग्राम प्रधानों को प्रशासक मानने से इनकार का मामला
➡हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील करेगी सरकार
➡डबल बेंच या फुल बेंच में अपील दायर करेगी सरकार
➡HC ने प्��धानों को प्रशासक मानने से किया है इनकार
➡जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने दिया था आ��ेश
➡प्रधान प्रशासक की भूमिका नहीं निभा सकते- हाईकोर्ट
➡कोर्ट ने सरकार को चुनावी रुपरेखा पेश करने को कहा
➡13 जुलाई तक चुनाव की रुपरेखा पेश करने का आदेश
➡समर्पित आयोग रिपोर्ट का तथ्य रख सकती है सरकार
➡OBC समर्पित आयोग के बिना नहीं हो सकते हैं चुनाव
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@Kameshwarvish11@myogiadityanath@vippartyindia@DmSonbhadra महोदय तत्काल इस मामले को संज्ञान में लेते हुए मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई ठेकेदार के ऊपर करने का कृपा करें। पैसा बचाने के चक्कर में ठेकेदार मनमानी तरीके से करते हैं कर।
#सोनभद्र चोपन नगर पंचायत क्षेत्र में विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि इंटरलॉकिंग सड़क के ऊपर ही(RCC) ढलाई का कार्य कराया जा रहा है स्थानीय लोगों ने कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। @myogiadityanath@vippartyindia@DmSonbhadra
��� सोनभद्र: ग्राम पंचायत बिल्ली मारकुंडी में प्रधानमंत्री आवास योजना की जियो-टैगिंग और लाभार्थी चयन पर गंभीर सवाल।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत बिल्ली मारकुंडी में सेक्रेट्री राहुल सिंह ने पंचायत मित्र के साथ मिलकर चुनिंदा लोगों की जियो-टैगिंग कर प्रधानमंत्री आवास योजना के फॉर्म भरवाए। आरोप है कि सूची में ऐसे लोगों को भी शामिल किया गया जिनके पास चार पहिया वाहन, 5 बीघा से अधिक कृषि ���ूमि और पहले से पक्के मकान हैं, जबकि कई वास्तविक गरीब और पात्र परिवार आज भी योजना के लाभ से वंचित हैं।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि कुछ लोगों को दो-दो और तीन-तीन बार आवास योजना का लाभ मिलने की बात सामने आ रही है। यदि यह सही है, तो यह अत्यंत गंभीर मामला है। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए कि किन लोगों को कितनी बार लाभ मिला, किस आधार पर मिला और इसमें किस स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई।
ग्रामीणों न��� मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, जियो-टैगिंग और लाभार्थी सूची का सत्यापन कराया जाए तथा यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका अनियमितता में पाई जाती है तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, वास्तविक पात्र एवं गरीब परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर आवास योजना का लाभ दिया जाए, ताकि किसी जरूरतमंद का हक न मारा जाए।
माननीय जिला प्रशासन एवं संबंधित अधिकारी तत्काल संज्ञान लें और पूरे प्रकरण की पारदर्��ी जांच सुनिश्चित करें।
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सोनभद्र में आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है डीएस माइनिंग का खनन?
खैरटिया गांव में घनी आबादी के बीच संचालित खदान के खिलाफ आदिवासी महिलाओं और ग्रामीणों ने लगातार चौथी बार जिला मुख्यालय से लेकर ओबरा तहसील तक खनन बंद कराने की मांग उठाई है। आरोप है कि शिकायत करने वाली आदिवासी महिलाओं को पट्टाधारक पक्ष द्वारा धमकाया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है।
ग्रामीणों का आरोप है कि न तो सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, न एंबुलेंस की व्यवस्था है और न ही नियमों के अनुरूप कांटा (वजन मापने की मशीन) लगाया गया है। लगातार ब्लास्टिंग से घरों में दरारें पड़ रही हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि ब्लास्टिंग की चपेट में आकर एक गाय घायल हो चुकी है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि घनी आबादी के बीच से पत्थरों से लदे तेज रफ्तार टीपर लगातार श्रीराम तिराहा, ओम चौराहा और अंधा मोड़ जैसे व्यस्त मार्गों से गुजर रहे हैं। यदि किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो गया, तो उसकी जिम्मेदारी कौन ? क्या संबंधित विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं?
आखिर घनी आबादी के बीच खदान का पट्टा कैसे आवंटित हुआ? बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? यदि आरोप सही हैं, तो खनन ��िभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
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🚨 सोनभद्र के नगर पंचायत ओबरा में आखिर किसके संरक्षण में हो रहा है यह नाली निर्माण? 🚨
वार्ड संख्या 15, ओम चौराहा पर ठेकेदार रघुराज सिंह द्वारा कथित रूप से घरों के अंदर से अंडरग्राउंड नाली निर्माण कराया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किस तकनीकी मानक और किस स्वीकृत नक्शे के आधार पर यह कार्य हो रहा है?
न सड़क की वास्तविक चौड़ाई स्पष्ट है, न नाली की रूपरेखा, न ही जनता को किसी प्रकार की जानकारी। स्थानीय लोगों द्वारा अधिशासी अधिकारी को सूचना देने के बावजूद कार्य जारी रहना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या नगर पंचायत ओबरा ठेकेदार ��ी मनमानी पर मौन सहमति दे रही है?
क्या बिना पारदर्शिता के केवल भुगतान पास कराने के लिए निर्माण कार्य कराया जा रहा है?
यदि सब कुछ नियमों के तहत है तो सार्वजनिक रूप से स्वीकृत एस्टीमेट, नक्शा और तकनीकी मानक जारी किए जाएं। अन्यथा यह मामला प्रशासनिक मिलीभगत और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका को बल देता है।
जनता जवाब मांग रही है। जांच हो, जिम्मेदारी तय हो और दोषियों पर कार्रवाई हो।
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🚨 सोनभद्र में स्वास्थ्य विभाग को खुली चुनौती या विभागीय चुप्पी? 🚨
सूत्र,जुगैल थाना क्षेत्र के सेमिया नई बस्ती स्थित मां कमला मेडिकल स्टोर पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मेडिकल स्टोर की आड़ में घर-घर घूमकर दवा बेची जा रही है और मरीजों को ड्रिप (पानी) भी चढ़ाई जा रही है।
❓क्या संचालक के पास मरीजों का इलाज करने, इंजेक्शन लगाने और ड्रिप चढ़ाने की वैध चिकित्सकीय अनुमति है?
⚠️ यदि बिना योग्य चिकित्सक, बिना पंजीकरण और बिना आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था के यह कार्य हो रहा है तो यह सीधे गरीब, ग्रामीण और आदिवासी परिवारों की जान से खिलवाड़ है।
सवाल स्वास्थ्य विभाग से—
▪️ मेडिकल स्टोर का लाइसेंस वैध है या नहीं? ▪️ इलाज और ड्रिप किस अधिकार से की जा रही है? ▪️ घर-घर दवा बेचने की अनुमति किसने दी? ▪️ क्षेत्र में संचालित अन्य झोलाछाप क्लीनिकों पर कार्रवाई कब होगी?
सोनभद्र के कई इलाकों में कथित झोलाछाप डॉक्टर और अवैध मेडिकल स्टोर गरीबों की मजबूरी को कमाई का जरिया बना रहे हैं। आखिर स्वास्थ्य विभाग कब जागेगा?
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सोनभद्र
● दुद्धि तहसील स्थित खोखा बालू साइड पर व्यापक अवैध खनन, रात्रिकालीन संचालन, स्वीकृत NOC/लीज शर्तों के घोर उल्लंघन, विभागीय मिलीभगत एवं शासन को राजस्व क्षति के संबंध में उच्चस्तरीय जांच कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई तथा थाना हाथीनाला द्वारा लॉ एंड आर्डर पालन नहीं किए जाने हेतु।
महोदय, @sonbhadrapolice@MinesMinIndia@ChiefSecyUP@Uppolice@UPGovt@DmSonbhadra@UpforestUp@admsonbhadra@NGTIndia@myogiadityanath@Uppolice@sonbhadrapolice@UPPCB@moefcc
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@RahulGandhi@priyankagandhi@Mayawati@yadavakhilesh@PMOIndia संज्ञान में लें
सविनय निवेदन है कि जनपद सोनभद्र की दुद्धि तहसील अंतर्गत संचालित खोखा बालू साइड पर स्वीकृत खनन लीज की शर्तों, पर्यावरणीय स्वीकृतियों तथा वन विभाग द्वारा निर्गत NOC का निरंतर एवं सुनियोजित उल्लंघन किया जा रहा है। उक्त खनन पट्टा मे० मंगल स्टोन प्रा० लि०, रायगढ़ के नाम आराजी संख्या–01, रकबा 11.336 हे० पर दिनांक 12/04/2023 से 11/04/2028 तक प्रतिवर्ष 2,26,800 घन मीटर बालू निकासी हेतु स्वीकृत है, जबकि स्थल पर वास्तविक संचालन स्वीकृत सीमा से परे जाकर अवैध रूप से किया जा रहा है।
लीज एवं NOC की स्पष्ट शर्त है कि खनन कार्य केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक संचालित होगा, किन्तु तथ्य यह है कि विभागीय संरक्षण में पूरी रात भारी मशीनों एवं वाहनों से निर्बाध खनन व परिवहन कराया जा रहा है, जो शासनादेशों एवं पर्यावरणीय मानकों की खुली अवहेलना है। वन क्षेत्र से होकर अवैध मार्गों का उपयोग, बिना वैध परमिट वाहनों की आवाजाही, वन कर वसूली में CCTV निगरानी का अभाव तथा जिला पंचायत बैरियरों की निष्क्रियता यह सिद्ध करती है कि यह कार्य बिना प्रशासनिक एवं विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं है।
प्रार्थी द्वारा इस गंभीर प्रकरण की शिकायत आईजीआरएस संदर्भ संख्या 40020026002584 दिनांक 17/02/2026 के माध्यम से की गई थी, किन्तु वन विभाग द्वारा पत्रांक -85/दुद्धी/आईजीआरएस दिनांक 23/02/2026 में भ्रामक एवं तथ्यविहीन आख्या प्रस्तुत कर शिकायत को निस्तारित कर दिया गया। जबकि संबंधित क्षेत्रीय रेंजर स्वयं मौखिक रूप से मेरे साथ में मौजूद साथियो��� ��े सामने स्वीकार कर चुके हैं कि रात्रिकालीन खनन NOC की शर्तों के प्रतिकूल हो रहा है एवं दंडनीय है। इसके बावजूद कोई कार्रवाई न होना विभागीय मिलीभगत, कर्तव्यहीनता एवं खनन माफियाओं को संरक्षण प्रदान करने का स्पष्ट प्रमाण है।
यह भी अत्यंत गंभीर विषय है कि थाना हाथीनाला पुलिस प्रशासन क्षेत्र में कानून-व्यवस्था लागू कराने में पूर्णतः विफल सिद्ध हो रहा है। यदि स्थानीय पुलिस सतर्क एवं निष्पक्ष होती तो इतनी व्यापक स्तर पर रात्रिकालीन अवैध खनन एवं परिवहन किसी भी दशा में संभव नहीं था। पुलिस एवं संबंधित विभागों की निष्क्रियता से शासन को भारी राजस्व क्षति, पर्यावरणीय विनाश, नदी तंत्र का क्षरण तथा शासन की छवि को गंभीर आघात पहुँच रहा है।
अतः आपसे अपेक्षा है कि जनहित एवं पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिगत तत्काल उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच समिति गठित कर खनन स्थल, परिवहन मार्गों, निकासी मात्रा, वन विभाग एवं स्थानीय पुलिस प्रशासन की भूमिका की जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों एवं पट्टेदार के विरुद्ध कठोर दंडात्मक एवं विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही जांच पूर्ण होने तक रात्रिकालीन खनन एवं परिवहन तत्काल प्रभाव से बंद कराया जाए।
यदि इस गंभीर शिकायत पर भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती है तो प्रार्थी बाध्य होकर माननीय उच्च न्यायालय / राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) / सक्षम न्यायिक मंच की शरण लेने हेतु विवश होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित विभागीय अधिकारियों की होगी।
सोनभद्र
● दुद्धि तहसील स्थित खोखा बालू साइड पर व्यापक अवैध खनन, रात्रिकालीन संचालन, स्वीकृत NOC/लीज शर्तों के घोर उल्लंघन, विभागीय मिलीभगत एवं शासन को राजस्व क्षति के संबंध में उच्चस���तरीय जांच कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई तथा थाना हाथीनाला द्वारा लॉ एंड आर्डर पालन नहीं किए जाने हेतु।
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सविनय निवेदन है कि जनपद सोनभद्र की दुद्धि तहसील अंतर्गत संचालित खोखा बालू साइड पर स्वीकृत खनन लीज की शर्तों, पर्यावरणीय स्वीकृतियों तथा वन विभाग द्वारा निर्गत NOC का निरंतर एवं सुनियोजित उल्लंघन किया जा रहा है। उक्त खनन पट्टा मे० मंगल स्टोन प्रा० लि०, रायगढ़ के नाम आराजी संख्या–01, रकबा 11.336 हे० पर दिनांक 12/04/2023 से 11/04/2028 तक प्रतिवर्ष 2,26,800 घन मीटर बालू निकासी हेतु स्वीकृत है, जबकि स्थल पर वास्तविक संचालन स्वीकृत सीमा से परे जाकर अवैध रूप से किया जा रहा है।
लीज एवं NOC की स्पष्ट शर्त है कि खनन कार्य केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक संचालित होगा, ���िन्तु तथ्य यह है कि विभागीय संरक्षण में पूरी रात भारी मशीनों एवं वाहनों से निर्बाध खनन व परिवहन कराया जा रहा है, जो शासनादेशों एवं पर्यावरणीय मानकों की खुली अवहेलना है। वन क्षेत्र से होकर अवैध मार्गों का उपयोग, बिना वैध परमिट वाहनों की आवाजाही, वन कर वसूली में CCTV निगरानी का अभाव तथा जिला पंचायत बैरियरों की निष्क्रियता यह सिद्ध करती है कि यह कार्य बिना प्रशासनिक एवं विभागीय मिलीभगत के संभव ��हीं है।
प्रार्थी द्वारा इस गंभीर प्रकरण की शिकायत आईजीआरएस संदर्भ संख्या 40020026002584 दिनांक 17/02/2026 के माध्यम से की गई थी, किन्तु वन विभाग द्वारा पत्रांक -85/दुद्धी/आईजीआरएस दिनांक 23/02/2026 में भ्रामक एवं तथ्यविहीन आख्या प्रस्तुत कर शिकायत को निस्तारित कर दिया गया। जबकि संबंधित क्षेत्रीय रेंजर स्वयं मौखिक रूप से मेरे साथ में मौजूद साथियों के सामने स्वीकार कर चुके हैं कि रात्रिकालीन खनन NOC की शर्तों के प्रतिकूल हो रहा है एवं दंडनीय है। इसके बावजूद कोई कार्रवाई न होना विभागीय मिलीभगत, कर्तव्यहीनता एवं खनन माफियाओं को संरक्षण प्रदान करने का स्पष्ट प्रमाण है।
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अतः आपसे अपेक्षा है कि जनहित एवं पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिगत तत्काल उच्चस्तरीय, निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच समिति गठित कर खनन स्थल, परिवहन मार्गों, निकासी मात्रा, वन विभाग एवं स्थानीय पुलिस प्रशासन की भूमिका की जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों एवं पट्टेदार के विरुद्ध कठोर दंडात्मक एवं विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही जांच पूर्ण होने तक रात्रिकालीन खनन एवं परिवहन तत्काल प्रभाव से बंद कराया जाए।
यदि इस गंभीर शिकायत पर भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती है तो प्रार्थी बाध्य होकर माननीय उच्च न्यायालय / राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) / सक्षम न्यायिक मंच की शरण लेने हेतु विव��� होगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित विभागीय अधिकारियों की होगी।