7 वर्षीय रागिनी के गांव पहुंचकर उससे मुलाकात की। पढ़ाई के जज्बे को देखते हुए ट्राईसाइकिल, किताबें, खिलौने, क्रच, टीएलएम किट व शैक्षिक सामग्री दी। पैर के ऑपरेशन हेतु CMO को जांच व उपचार के निर्देश दिए। शौचालय व सड़क मरम्मत की भी व्यवस्था के निर्देश दिए।
बाबा नीम करौली के अनन्य भक्तों में से एक रहे दादा मुखर्जी ने अपनी किताब "द नियर एंड द डियर: - स्टोरीज ऑफ नीम करौली बाबा एंड हिज डिवोटिज" में लिखा है कि "कैसे महाराज जी एकदम से रात में उनके सामने आ गए" और कहने लगे की तुमने मुझे 400 मील दूर से बुलाया, तुम मुझे याद कर रहे थे "
अगली सुबह, महाराजजी का व्यवहार पूरी तरह बदल गया था। पिछली रात वाली तीव्रता अब नहीं थी; उन्होंने दादा से कहा, "जब भी तुम मुझे याद करोगे, मैं आ जाऊँगा।" दादा सोचते हैं कि यह वादा कोई नई बात नहीं है—यह एक ऐसा भरोसा है जो संतों ने हमेशा अपने भक्तों को दिया है।
#Neemkrolimaharaj #Hanumanansh
जौहर राजपूतों की एक युद्धकालीन प्रथा थी। जब किला घिरा होता और हार पक्की लगती, तो महिलाएं (और बच्चे) सामूहिक रूप से आग में कूदकर आत्मदाह कर लेती थीं। इसका मकसद यह था कि दुश्मन उन्हें पकड़कर अपमानित न कर सके, गुलाम न बना सके या बलात्कार न कर सके।
यह रोजमर्रा का रीति-रिवाज नहीं था। सिर्फ घेराबंदी के समय होता था। महिलाएं शादी के कपड़े पहनकर रात को जौहर कुंड में आग लगाकर प्रवेश करती थीं। अगली सुबह पुरुष साका करते थे — केसरिया वस्त्र पहनकर, माथे पर राख लगाकर किले से निकलकर लड़ते हुए मृत्यु को गले लगाते थे।
सबसे प्रसिद्ध जौहर चित्तौड़गढ़ में हुए:
1303 में अलाउद्दीन खिलजी के हमले के समय (रानी पद्मिनी की कहानी से जुड़ा)
1535 में बहादुर शाह के हमले के समय (रानी कर्णावती)
1568 में अकबर के घेरे के समय
राजपूत संस्कृति में जौहर को कायरता नहीं, बल्कि अभय राजपूत जौहर माना जाता था। यह सम्मान (मर्यादा) की रक्षा का सबसे बड़ा प्रतीक था। दुश्मन के हाथों जीवित बचना अपमान से भी बड़ा माना जाता था, इसलिए आग को चुना गया।
यह सती से अलग है। सती में विधवा अपने पति की चिता पर बैठती थी। जौहर सामूहिक होता था और युद्ध के दौरान, जब पुरुष अभी जीवित या लड़ रहे होते थे।
आज यह प्रथा नहीं है, लेकिन राजपूत इतिहास और लोकगीतों में इसे साहस और बलिदान का प्रतीक माना जाता है।
#jauhar #जोहार #history
@arohishukl50402@dmballia@dmballia कृपया बच्ची की मदद करे और सभी सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराने का कष्ट करें।आप विनम्र व व्यवहारिक अधिकारी है आपसे सदैव बेहतर की अपेक्षा रहती है।
प्रदेश ठीक करना है तो मुख्यमंत्रियों को चाहिए कि समय-समय पर एक-दो कमिश्नर/ IG/ DIG और 2-4 डीएम-एसपी को नाप दिया करें।
और जिला ठीक करने के लिए डीएम-एसपी को चाहिए कि समय-समय पर 2-4 SDM / CO/SHO का विकेट गिरा दिया करें। गंभीर मामलों में जेल भी भेजने से परहेज़ न करें।
हर कार्रवाई के बाद प्रदेश और जिला कम से कम साल-छह महीने के ठीक चलेगा। फिर , जब ढाक के तीन-पात की स्थिति आए तो वही कार्रवाई दोहराई जाए।
लेकिन, ऐसी कार्रवाई तभी हो सकती है, जब ऊपर बैठे लोगों में नैतिक बल हो और वो अपने अधीनस्थों से मलाई न खा रहे हों।
@awesh29 अपने अधिकार के लिए लड़ना अच्छी बात है। इस देश में धरातल पर बदलाव तभी आएगा जब लोग सवाल पूछेंगे। अधिकारियों के फाइलों में सब कुछ संगमरमर सा चमकता है।
राज्यों के Exams में पहली गलती छात्रों को Self Centre नहीं देने की है. अपने शहर में रहते तो सुबह घर में पूजा, माता-पिता का आशीर्वाद लेकर Exam Centre में 1 घंटे में पहुच सकते हैं. Fresh भी रहते. आप दूसरे मंडल में भेज कर उनको सड़क, स्टेशन आदि में रहने में मजबूर कर रहे. 10 & 12 का Exam आप जिले में ही करवा रहे, पर वो परीक्षा जिससे छात्रों की जिंदगी बननी है वो जबरदस्ती दूसरे मंडल भेज रहे. चलो माना सरकार को Revenue भी चाहिए तो Exam fees अगर 100 rs है तो जिनको अपने जिले में देना है उसकी fees 200/500 कर दे. Option देना चाहिए. आप Exams से पहले बच्चों पर Stress डाल देते हैं. नॉर्मल परिवार वाले की पीड़ा समझे. अफसर बाबु लोग तो बच्चों को सरकारी गाड़ी, अर्दली के साथ सरकारी गेस्ट हाउस में रुकवा देगा.. यह तो वैसे हुआ कि दो बच्चे की दौड़ लगा दी..बाबु का बेटा Expressway पर "Daddydas" का जूता पहन कर दौड़े, गरीब का बच्चा बगल में रेल्वे लाइन पर पत्थरों पर दौड़े...
डॉक्टर का काम इलाज करना है. किसी खास लैब का प्रचार करना नही.
मरीज को अपनी पसंद की किसी भी मान्यता प्राप्त लैब से जांच करने का पूरा अधिकार होना चाहिए.
दूसरी लैब की रिपोर्ट देखकर नाराज होना या उसे खारिज करना गलत है. ऐसे प्रथाओं पर रोक लगनी चाहिए,
क्यों कि इसका नुकसान सीधे मरीज की जेब और भरोसे पर दोनों पर होता है. इस मुद्दों को उठाने के लिए @raghav_chadha की पहल सराहनीय है. इस मामले में मरीजों के हितों में ठोस सुधार होना चाहिए.
@lkopolice@Uppolice@uptrafficpolice यातायात के सुप्रीमो को अवगत कराइये दिशा सही नहीं होने से दशा बिगड़ती जा रही है।
आम जनता की मोटरसाइकिल भी कहीं सड़क के किनारे खड़ी नहीं हो सकती है।गली गली में तो पार्किंग है नहीं ,आखिर आम आदमी गाड़ी कहां पार्क करेगा।कोई रिकॉर्ड है कितने सरकारी वाहन नो पार्किंग से उठाए गए है?
@Uppolice@uptrafficpolice@lkopolice कुछ तो रहम करिये, ट्रैफिक के विद्वानों की फौज है आपके पास। ये हालत है शहर की एक जगह से दुसरे जगह पहुचने में 2-3 घण्टे लग रहा है । ये वर्तमान स्थिति है प्लासियो माल के सामने की। #failtrafficlucknowpolice , सिर्फ गाड़ी उठाने में नंबर वन है।