And now, all of a sudden, bank of baroda wants disinvestment of our bank.
Our fight is to save the legacy of 100 years. For so many people who have dedicated their lives to this bank.
I am one of them. I am a proud NTBian.
#Savenainitalbank
पर आज, 101 वे स्थापना दिवस पर हम उन सब को धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने इस बैंक को हमारा घर बनाने में सहयोग दिया...
Here's to 100 years and beyond: a living legacy of trust...
100 years of sheer brilliance..
100 years of Nainital Bank!
100 वर्ष के कार्यकाल में ना जाने कितने ही बैंकर्स इस लिगेसी के भागीदार बने हैं, कितने शहीद हुए हैं, कितने अब तक कन्नी पकड़े चल रहे हैं... जिनके ना हम नाम जान���े हैं, ना उनके किये कार्यों का ही ब्यौरा है हमारे पास...
हमने रिश्ते बनाये हैं, और निभाये भी है... people first के मिशन के साथ बैंक ने अपने स्तर सदैव देशहित में लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया ह���... बैंक के कर्मचारियों ने बैंक के लिए अपनी सैलरी तक छोड़ी है...
एक कागज़ पर तीन sign करवा कर KYC करने वाला बैंक, कंप्यूटर की तेज़ रफ़्तार को भांप कर उसके साथ हो लिया.. और इसी वर्ष 11 फरवरी स��� लेटेस्ट टेक्नोलॉजी को अपना कर बाकी बैंकों से साथ आकर खड़ा है...
आपको लगेगा कि ये नाम जान कर हम क्या करेंगे.. पर ये नाम जान'ने जरूरी है.. क्योंकि आज जिस बैंक को हम गर्व से अपना बता रहे हैं और इस 100 वर���ष की उपलब्धि पर फूले नहीं समाते हैं, हमें याद रखना चाहिए कि ये किन लोगों की लिगेसी है जिसे हम जी रहे हैं..
31 जुलाई 1922 को बैंक को इनकारपोरेशन सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ और इस तरह ये बैंक अस्तित्व में आया...
पहली ब्रांच के प्रबंधक बने रामकृष्ण तिवारी, लेखाकार हुए चिरंजी लाल, क्लर्क कस रूप में थे नरेंद्र सिंह, और पहले केशियर रहे बिजई साह....
30 जुलाई 1922 को रविवार की दोपहर में, न्यूबेरी लॉज नाम की एक बिल्डिंग में सभी सदस्य एकत्र हुए, और नैनीताल बैंक के प्रथम डायरेक्टर बने- लाला परमा साह, पंडित गोविंद बल्लभ पंत, और राय साहब मथुरा दत्त पांडे...
कुमाऊँ के मूल निवासियों को बैंकिंग सेवा प्रदान करने की नीयत से जब इस बैंक की परिकल्पना की गई, तब किसी ने नहीं सोचा था कि ये कुमाऊँ से इतर भी लोगों को बैंकिंग सेवा प्रदान करेगा... और ये तो निश्चित ही नहीं सोचा होगा कि ये बैंक 100 वर्ष की अवधि को तय करेगा...
इन्होंने नैनीताल बैंक की नींव रखी और स्वयं भी बन गए नींव की ईंट...
किसी भी संस्था का उत्थान उसकी नींव पर टिका होता है, और यहाँ तो जड़ों में बड़ी शालीनता से बसी हुई थी देशभक्ति.. "अमूल्य रिश्तों का अटूट बंधन" स्वयं में ही नैनीताल बैंक के अस्तित्व का परिचायक है...
सुनो कहानी नैनीताल की...
100 साल पहले साथ आये
एक ठेकेदार, लाला परमा शाह,
दो वकील, गोविंद बल्लभ पंत और मथुरा दत्त पांडे,
सरकारी खजांची, मोहन लाल शाह,
एक व्यापारी, अब्दुल क़ुअय्यं,
और दो रईस, चंद्र लाल साह रियाज़ और देबी लाल साह...
#SaveNainitalBank