@nishikant_dubey@RahulGandhi इंदिरा गांधी को छोड़, वर्तमान की बात कर। मुनाफा दे रहा विशाखापट्टनम स्टील प्लांट 2014-16 से घाटे में चला गया, क्यों ? इसका निजीकरण करके किसे फायदा पहुंचाना चाहती थी सरकार ?
निजीकरण के विरोध में हुए जन आंदोलन के कारण मोदी सरकार को अपने कदम वापस लेने पड़े
https://t.co/h0kgo5zvGZ
@PMOIndia@narendramodi मोदी जी से देश के सबसे पीड़ित और गरीब इंसान अड़ानी जी की पीड़ा सहन नहीं हुई। तभी उन्होंने 1020 ऐकड़ जमीन को 1 ₹ साल के हिसाब से 30 साल के लिए लीज पर दी है।
ईमानदारी से कर नहीं पाओगे। कांग्रेस के कार्यकाल में सारे आंदोलन में संघ का अहम भूमिका है। तुम ये येन केन प्रकेन साबित करना चाहते हो कि किसान आंदोलन में विदेशी हाथ था, शाहीनबाग आंदोलन में विदेशी हाथ था। जांच को ढाल बना कर वही करना चाहते हो जो तुम्हारे मन में हैं। सच्चाई के तह में जाने के लिए ये प्रपंच नहीं रचना पड़ता है। पिछले दस साल में जो आंदोलन हुए है उसके बारे आपको नहीं पता है तो इसका मतलब है अमित शाह के कार्यकाल में इंटेलीजेंस फेल है, अमित शाह नाकाम हैं। और पता था तो ये ढोंग नहीं रचो।
वनतारा का भी तुमने ऐसे ही फर्जी न्यायिक जांच कराई। क्या फैसला आना था सबको मालूम था, अंबानी और उसके औलाद के ऊपर और कोई आरोप नहीं लगाए इसलिए न्यायिक ढाल खड़ा कर दिया गया। अब कोई कुछ बोलेगा तो अंबानी मानहानि करेगा।
#वोटचोर_गद्दीछोड़
#VantaraCleanChit
#Vantara
चुनाव चोरी की एक अनोखी कहानी
कर्नाटक चुनाव के पहले, अलंद विधानसभा में एक विचित्र घटना घटी। एक महिला BLA के पास नाम काटने का एक अप्लिकेशन आया। यह अप्लिकेशन उसके अपने भाई के नाम पर था।
उसने भाई से पूछा कि आपने अपना नाम काटने का अप्लिकेशन क्यों दिया? भाई ने कहा कि उसने तो कोई अप्लिकेशन नहीं दिया।
महिला को शक हुआ। उसने तफ्तीश की और कांग्रेस प्रत्याशी बी आर पाटिल को बताया कि लोगों की जानकारी के बिना उनके नाम काटने का आवेदन आ रहा है। पाटिल ने तफ्तीश कराई और पाया कि 6000 से ऊपर आवेदन आए हैं। इनमें से मात्र 47 असली हैं। बाकी सब फर्जी हैं।
मजे की बात, इन 6000 आवेदकों में 90% कांग्रेस के वोटर थे। पाटिल ने रिटर्निंग ऑफिसर से शिकायत की। रिटर्निंग अधिकारी ने मामला संदिग्ध पाया, वोटर का नाम काटने की प्रक्रिया रोक दी और FIR दर्ज करा दी।
तब से राज्य पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच दल ने अब तक चुनाव आयोग को 12 बार पत्र लिखा है और जांच में सहयोग मांगा है। यह चुनाव आयोग ही बता सकता है कि ये आवेदन कहां से, किस IP एड्रेस से, किसने भेजे?
लेकिन चुनाव आयोग दो साल से मौन है और कोई जवाब नहीं दिया है। आरोप है कि आयोग ने इस फ्रॉड से जुड़े जो जरूरी दस्तावेज सार्वजनिक थे, उन्हें भी हटा लिया।
चुनाव आयोग राजा तो है नहीं। संविधान के मुताबिक वह जनता का नौकर है। लेकिन डेढ़ लोगों की भ्रष्टाचारी सरकार की शह पाकर अपने को सुल्तान समझ रहा है। जवाब देने की जगह बेअंदाजी से बात करता है, धमकाता है, पर संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं निभाता।
यह आयोग का काम था कि तुरंत जांच होती और मामला साफ होता। लेकिन वह जांच को प्रोत्साहित करने की जगह अड़ंगा लगा रहा है। वह सबूत छुपा रहा है। ऐसा करके आयोग किसे बचा रहा है? क्या इस फ्रॉड में आयोग शामिल है? अगर नहीं तो वह जांच क्यों नहीं कर रहा जो उसका मूलभूत काम है?
ऐसा लगता है जैसे पूरे देश में वोट चोरी के लिए संगठित गिरोह सक्रिय है और उसे सर्वोच्च सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। पारदर्शिता और निष्पक्षता के नाम पर सिर्फ झूठ, छल और बेशर्मी बची है। लोकतंत्र के नाम पर सिर्फ एक सस्ती, अश्लील और कायर तानाशाही बची है।
यह आपका देश है जिसे राष्ट्रवाद और तिरंगे की आड़ में बर्बाद किया जा रहा है।
ये वाक़ई हैरान करता है।
ADG लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश को कानपुर जाना चाहिए था जहाँ अखिलेश दुबे जैसा इतना बड़ा प्रकरण हो गया है!!
उन्हें ग़ाज़ीपुर जाना चाहिए था जहाँ पुलिस की बर्बर लाठियों ने जोखू उपाध्याय की जान ले ली!!
उन्हें बाराबंकी जाना चाहिए था जहाँ ABVP के कार्यकर्ताओं को इतनी बुरी तरह पीटा गया कि लाठियों ने भी थकान महसूस कर ली!!!
उन्हें बनारस जाना चाहिए था जहाँ पुलिस और वक़ीलों के बीच आपसी अविश्वास का तांडव बरस रहा है!!
उन्हें नोएडा जाना चाहिए था जहाँ क़ानून व्यवस्था की लाठियां किसानों की पीठ पर अपनी मज़बूती का परीक्षण कर रही हैं!!
मगर वे इन जगहों की जगह गोरखपुर जाने का चुनाव करते हैं जहाँ CM योगी के क्षेत्र में एक आपराधिक घटना घट गई है!!
यक्ष प्रश्न बड़ा पुराना है!!
अब्राहम लिंकन लिख गए हैं कि लोकतंत्र जनता का, जनता से, जनता के लिए शासन करने वाला तंत्र है!!
क्या यूपी पुलिस अब्राहम लिंकन के इस कथन को कुछ इस तरह परिभाषित कर रही है कि क़ानून व्यवस्था का मतलब-
“योगी आदित्यनाथ का, योगी आदित्यनाथ से और योगी आदित्यनाथ के लिए है!!”
बिहार के जहानाबाद में अजीब घटना!
स्कूल जाने की जल्दी में बंद का विरोध करने वाली शिक्षिका को ही
👉 जिला शिक्षा पदाधिकारी ने नोटिस थमा दिया
👉 यही है BJP सरकार का “नया न्याय”
👉 आवाज़ उठाओ तो कार्रवाई, चुप रहो तो अत्याचार
#Bihar#BJPExposed
बकरे की माँ कब तक खैर मनाती। वोट चोरी नहीं डकैती का ये खेल 2018 से ही चल रहा है। जांच की आँच चुनाव आयोग से ऊपर सरकार व संघ मुख्यालय तक पहुँचनी तय है, केवल वक़्त का फेर है ….
https://t.co/LadBQ7DWsq
@azizkavish इस तरह के नीच इंसान कहलाने के लाइक नहीं है ये दरिंदे जानवर भी गए गुजरे है..
देश का युवा किस ओर जा रहा है और किस मानसिकता के साथ जीना चाहता है पता नहीं?
पहले रेप किया फिर डांस करके और परेशान कर रहा है ये इंसान तो बिल्कुल भी नहीं हो सकता है..
@MediaHarshVT मैं किसी गाली का समर्थन नहीं करता।
मोदी को भीड़ में किसने गाली दी, कोई नहीं जानता।
मगर 2019 में राहुल गांधी को BJP के प्रदेश अध्यक्ष ने मां की गाली दी थी।
कार्रवाई तो दूर, बीजेपी ने उन्हें इनाम में विधानसभा टिकट पकड़ा दिया। 👇
त्रिपाठी जी इसपर क्या कहेंगे..