जिला अध्यक्ष अंशुल भारती जी के नेतृत्व में भाटपार रानी विधानसभा के समस्त पंचायत सहायकों ने विधायक श्री सभाकुँवर कुशवाहा जी को ज्ञापन सौंपकर पंचायत सहायकों की लंबित समस्याओं के समाधान की मांग की।
#PanchayatSahayak@psunionup@BrijeshMishraPA@PSKUnionUP@oprajbhar
🚨 पंचायत सहायकों के साथ आखिर दोहरा व्यवहार क्यों?
“निदेशक पंचायतीराज उ०प्र० द्वारा पूर्व में जारी पत्र संख्या 6/1181/2025-6/203/2022-23 दिनांक 10 जून 2025 एवं पुनः दिनांक 01 जून 2026 के आदेशों का आज तक पालन सुनिश्चित नहीं कराया गया।” जिनमें ग्राम सचिवालयों में आवश���यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। @DirectorUPPR
आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि पंचायत सहायकों को उपलब्ध कराए जाएँ —
✅ कंप्यूटर / आवश्यक उपकरण
✅ स्थायी इंटरनेट सुविधा
✅ स्टेशनरी सामग्री
✅ पेयजल, शौचालय एवं साफ-सफाई व्यवस्था
✅ कार्यस्थल की मूलभूत सुविधाएँ
✅ समय पर मानदेय भुगतान
✅ नियमित समीक्षा बैठकें
लेकिन दुःखद सत्य यह है कि आज तक अधिकांश जनपदों में DPRO, CDO, BDO, ADO पंचायत, पंचायत सचिव एवं ग्राम प्रधानों द्वारा इन आदेशों का पालन सुनिश्चित नहीं कराया गया। @uppanchayatiraj
❗जब संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, तब पंचायत सहायक कर्मचारी यूनियन उत्तर प्रदेश द्वारा “संसाधन नहीं तो ऑनलाइन उपस्थिति नहीं” अभियान चलाया गया, तो प्रशासन ने समस्या का समाधान करने के बजाय पंचायत सहायकों को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया। @oprajbhar @DirectorUPPR
⚠️ कई जिलों में पंचायत सहायकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
⚠️ वेतन रोकने की कार्रवाई हो रही है।
⚠️ FIR तक दर्ज कराई जा रही है।
अब सवाल शासन और प्रशासन से — @CMOfficeUP
यदि पंचायत सहायकों को शासनादेश के अनुरूप संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
��ब निदेशक महोदय के आदेशों का पालन नहीं हुआ तो —
क्या किसी DPRO, BDO, ADO, सचिव या ग्राम प्रधान पर कोई कार्रवाई हुई? @DMKanpurDehat
@CdoKanpurDehat @DehatDpro
या नियम और कानून केवल पंचायत सहायकों पर लागू होते हैं?
📌 हम मांग करते हैं कि निदेशक महोदय द्वारा जारी आदेशों के अनुपालन की जनपदवार समीक्षा कराई जाए।
📌 जिन अधिकारियों ने आदेशों का पालन नहीं कराया, उनकी जवाबदेही तय हो।
📌 पंचायत सहायकों पर हो रही अन्यायपूर्ण नोटिस एवं का���्यवाही तत्काल रोकी जाए।
📌 संसाधन उपलब्ध कराए बिना किसी भी कर्मचारी पर दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
नियम सबके लिए समान होने चाहिए, केवल कर्मचारियों पर दबाव बनाने के लिए नहीं।
@myogioffice
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@ChiefSecy_UP
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🚨 शासन ने आदेश जारी किए… लेकिन पालन अब तक क्यों नहीं?
दिनांक 15 जून 2026 को पंचायत सहायकों / अकाउंटेंट-कम-डाटा एंट्री ऑपरेटर की विभिन्न समस्याओं के समाधान हेतु शासन स्तर ��े महत्वपूर्ण आदेश जारी किए गए थे।
📌 मानदेय का नियमित एवं समयबद्ध भुगतान
📌 कार्य हेतु विभागीय मोबाइल उपलब्ध कराने के निर्देश
📌 प्रत्येक माह कार्यों की समीक्षा अनिवार्य
📌 लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय
लेकिन बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि —
❌ अधिकांश जनपदों में आज तक आदेशों का पालन प्रारंभ नहीं हुआ।
❌ हमारे जनपद में भी किसी स्तर पर कोई ठोस कार्यवाही दिखाई नहीं द�� रही।
❌ ऐसा प्रतीत होता है कि शासन के आदेश केवल कागजों और फाइलों तक सीमित हैं।
अब कुछ सीधे सवाल —
❓ आदेश जारी होने के बाद अनुपालन की समीक्षा कौन करेगा?
❓ यदि आदेशों का पालन नहीं हो रहा तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
❓ क्या पंचायत सहायकों से जुड़े आदेश केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं?
✊ अब समय आ गया है कि आदेशों का वास्तविक क्रियान्वयन सुनिश्चित हो।
हमें केवल आश्वासन नहीं, ज़मीन पर परिणाम चाहिए��
पंचायत सहायक कर्मचारी यूनियन, उत्तर प्रदेश
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#जय_पंचायत_जय_सहायक @DehatDpro @DMKanpurDehat @CdoKanpurDehat @DirectorUPPR @uppanchayatiraj @myogiadityanath @UPGovt
वाह एडीओ साहब! 👏
पंचायत सहायकों पर FIR कराने में तो बड़ी फुर्ती दिखाई।
अब ज़रा इन लाखों रुपये के विकास कार्यों पर भी वही फुर्ती दिखा दीजिए।
जहाँ निर्माण कार्य के प्रमाण के नाम पर हाथ, उंगली और धुंधली तस्वीरें अपलोड हैं... वहाँ अब तक कितनी FIR हुई?
या फिर कार्रवाई सिर्फ वहीं होती है जहाँ आवाज़ कमजोर हो? न्याय का तराजू सबके लिए बराबर होना चाहिए साहब।
��ंचायत सहायकों पर कठोरता और बाकी मामलों में चुप्पी... यह सवाल तो उठेगा ही।
या थोड़ा और तीखा
पंचायत सहायकों पर FIR... और लाखों के निर्माण कार्यों में प्रमाण के नाम पर हाथ की फोटो!
यहाँ तो एक-एक रुपये का हिसाब पंचायत सहायकों से माँगा जा रहा है, लेकिन वहाँ लाखों के कार्यों में ऐसी तस्वीरें देखकर भी किसी की जिम्मेदारी तय नहीं होती।
कानून अगर सच में सबके लिए बराबर है, तो कार्रवाई भी बराबर दिखनी चाहिए।
डीएम साहब @dmamethi @DPROAmethi से विनम्र निवेदन है जांच कर आवश्यक कार्यवाही की जाए नियम सबके लिए समान होना चाहिए हमारे निर्दोष पंचायत सहायकों ने खुद के पैसे लगाकर सेवाएं दी थी अब उल्टा उन्हें ही फसाया जा रहा है तो फिर यह भी देखा जाए उस ब्लॉक में कितना ईमानदारी से कार्य हो रहा है...!
माननीय मुख्यमंत्री जी,
@myogiadityanath
बड़े दुःख और पीड़ा के साथ यह कहना पड़ रहा है कि जिन पंचायत सहायकों को उनके समर्पण, सेवा-भाव और जिम्मेदारी के लिए सम्मानित किया जाना चाहिए था, आज उन्हीं के विरुद्ध ब्लॉक स्तर से FIR की क��र्यवाही की जा रही है।
पिछले लगभग तीन वर्षों से ग्राम पंचायतों में जनसेवा केंद्र (CSC) संचालित हो रहे हैं। शासनादेश संख्या 1541/33-3-2022-989/2021 दिनांक 02.08.2022 में स्पष्ट व्यवस्था की गई थी कि CSC Wallet का रिचार्ज ग्राम पंचायत द्वारा कराया जाएगा। लेकिन वास्तविकता यह रही कि अधिकांश ग्राम पंचायतों में यह व्यवस्था लागू ही नहीं हुई।
ऐसी स्थिति में पंचायत सहायकों के सामने दो ही विकल्प थे या तो ग्रामीणों को यह कहकर वा��स लौटा दें कि Wallet में बैलेंस नहीं है, या फिर अपनी जेब से पैसा लगाकर सेवाएँ जारी रखें।
पंचायत सहायकों ने दूसरा विकल्प चुना।
उन्होंने अपने निजी धन से CSC Wallet रिचार्ज किया। अपने मोबाइल, इंटरनेट और संसाधनों का उपयोग किया। ग्राम सचिवालय बंद नहीं होने दिया और ग्रामीणों को बिना सेवा लौटाया नहीं।
- जब पंचायत सहायक अपनी जेब से रिचार्ज कर रहे थे, तब संबंधित अधिकारी कहाँ थे?
- शासनादेश के अनुसार ग्राम पंच��यत से रिचार्ज क्यों नहीं कराया गया?
- तीन वर्षों तक इस व्यवस्था की समीक्षा क्यों नहीं की गई?
- यदि ��ासनादेश का पालन नहीं हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी केवल पंचायत सहायकों पर ही क्यों डाली जा रही है?
सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि जिस OSR खाते में धनराशि जमा होनी थी, उस खाते का संचालन पंचायत सहायक के पास था ही नहीं। वह न खाताधारक था, न हस्ताक्षरकर्ता और न ही उसे उस खाते के संचालन का कोई वैधानिक अधिकार दिया गया था। फिर धनराशि जमा न होने का सम्पूर्ण उत्तरदायित्व केवल पंचायत सहायक पर किस आधार पर निर्ध���रित किया जा रहा है?
@uppanchayatiraj
@DirectorUPPR
@ChiefSecyUP
@DmAmethi
@dpro_amethi
यदि पंचायत सहायकों पर बिना निष्पक्ष जांच के कोई भी दंडात्मक या आपराधिक कार्यवाही की जाती है, तो समस्त पंचायत सहायक CSC से संबंधित कार्य बंद करने के लिए विवश होंगे। इसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था की होगी, क्योंकि कोई भी कर्मचारी अपने निजी धन से अनिश्चितकाल तक सरकारी सेवाएँ संचालित नहीं कर सकता।
उत्तर प्रदेश का कोई भी पं���ायत सहायक CSC से मिलने वाला ₹5 प्रति सेवा का प्रोत्साहन नहीं चाहता। यदि यही ₹5 भविष्य में विवाद और आरोपों का कारण बन रहा है, तो कृपया यह राशि भी सीधे ��्राम पंचायत के OSR खाते में जमा करा दीजिए।
हमें कमीशन नहीं चाहिए।
हमें केवल हमारे नियमित, स्थायी कार्यों के अनुरूप सम्मानजनक मानदेय चाहिए।
🚨 लगातार मिल रहे पंचायत सहायकों के त्यागपत्र… क्या यह पंचायत व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी नहीं?
हाल ही में जनपद शाहजहांपुर से सामने आई स्थिति, जहां बड़ी संख्या में पंचायत सहायकों द्वारा त्यागपत्र दिए गए, यह केवल एक प्रशासनिक सूचना नहीं बल्कि ग्रामीण ���िकास व्यवस्था पर गहरा संकट है।
पंचायत सहायक आज ग्राम पंचायत और ग्रामीण जनता के बीच सरकार की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने वाली सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।
लेकिन दुर्भाग्य देखिए —
❌ मात्र ₹6000 मासिक मानदेय
❌ निजी मोबाइल, इंटरनेट, लैपटॉप, प्रिंटर, बिजली सहित निजी संसाधनों से सरकारी कार्य
❌ लगातार बढ़ता कार्यभार, लेकिन संसाधन शून्य
❌ समय पर भुगतान नहीं
❌ सेवा सुरक्षा नहीं, नियमितीकरण नहीं
❌ जिम्मेदारी बढ़ती जा रही, लेकिन सम्मान और सुविधा नहीं
जब एक पंचायत सहायक मजबूर होकर त्यागपत्र देता है, तो उसका असर केवल एक कर्मचारी पर नहीं पड़ता —
⚠ ग्राम पंचायत की डिजिटल सेवाएं प्रभावित होती हैं
⚠ ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ मिलने में देरी होती है
⚠ पंचायत स्तर पर शासन की योजनाओं का क्रियान्वयन कमजोर होता है
⚠ डिजिटल इंडिया और ग्रामीण प्रशासन की नींव प्रभावित होती है
हम सरकार से गंभीरता से मांग करते हैं —
📌 पंचायत सहायकों के मानदेय की तत्काल समीक्षा की जाए।
📌 कार्य हेतु विभागीय मोबाइल, इंटरनेट, कंप्यूटर एवं अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जाए���।
📌 पंचायत सहायकों को सम्मानजनक वेतनमान दिया जाए।
📌 सेवा नियमावली बनाकर नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाए।
📌 लगातार बढ़ रहे त्यागपत्रों के कारणों की शासन स्तर पर जांच कर तत्काल समाधान किया जाए।
यदि पंचायत सहायकों की समस्याओं को समय रहते नहीं समझा गया, तो आने वाले समय में पंचायत व्यवस्था कमजोर होगी और ग्रामीण जनता तक सरकारी सेवाओं की पहुँच प्रभावित होगी।
✊ पंचायत सहायक केवल कर्मचारी नहीं, ग्रामीण भारत की प्रशासनिक रीढ़ हैं।
उन्हें सम्मान, सुरक्षा और अधिकार मिलना ही चाहिए।
पंचायत सहायक कर्मचारी यूनियन, उत्तर प्रदेश
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@UPPanchayatiRaj
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@MoPR_goi @uppanchayatiraj
@DirectorUPPR
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#पंचायत_सहायक_कर्मचारी_यूनियन_उत्तर_प्रदेश
#जय_पंचायत_जय_सहायक
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पंचायत सहायकों को बहुत मजबूत बनाती एकता और आज उत्तर प्रदेश के पंचायत सहायकों में फूट पड़ी पड़ी है जिस दिन आप एक साथ एक मंच पर आ जाएंगे तो हम सौ पेशेंट कह रहे हैं कि पंचायत सहायकों को जीत मिल जायेगी
@BrijeshMishraPA@PSKUnionUP@psunionup