अगर परीक्षा में कोई अनियमितता हुई है, तो दोषियों पर कार्रवाई हो।
हम जैसे आदिवासी छात्र-छात्राएं अपनी मेहनत और ईमानदारी से परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों को इसकी सजा क्यों?
JSSC CGL में सफल अभ्यर्थियों को न्याय देना होगा @HemantSorenJMM सर!
#JSSC_JPSC_चयनितों_को_न्याय_दो
भाजपा और कोचिंग माफियाओं से सवाल!
ऐसे गरीब युवाओं के संघर्ष, उनके सपनों और उनके परिवारों की उम्मीदों की आखिर क्या कीमत लगाएंगे?
युवाओं के भविष्य को कारोबार और राजनीति का हथियार बनाना बंद कीजिए। जवाब देना होगा!
नौकरी की लड़ाई लड़िए, नौकरी खाने की मुहिम मत चलाइए।
मान लीजिए किसी अपराध में 100 लोग संदिग्ध हैं, लेकिन अपराध सिर्फ 50 लोगों ने किया। तो क्या बाकी 50 निर्दोषों को भी फांसी पर चढ़ा दिया जाएगा?
नहीं। क्योंकि न्याय का अर्थ दोषी और निर्दोष में फर्क करना है।
फिर नियुक्तियों के मामले में यह फर्क क्यों नहीं?
अगर चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है तो निष्पक्ष और समयबद्ध सीबीआई जांच हो, गलत तरीके से चयनित लोगों की नौकरी जाए और दोषियों को सजा मिले।
लेकिन जो अभ्यर्थी अपनी मेहनत और मेरिट से निष्पक्ष तरीके से चयनित हुए हैं, उनकी नौकरी क्यों छीनी जाए?
क्या किसी और की गलती की सजा किसी निर्दोष के परिवार को मिले?
क्या अपनी बेरोजगारी का इलाज दूसरे की रोजी-रोटी छीनना है?
दोषी की नौकरी जानी चाहिए, निर्दोष की नहीं।
दोषी को सजा मिलनी चाहिए, निर्दोष को सुरक्षा।
वरना यह रोजगार के अधिकार की लड़ाई नहीं,
“मुझे नहीं मिली तो तुम्हें भी नहीं रहने दूंगा” वाली कुंठा और प्रतिशोध की लड़ाई बन जाएगी।
@JPSCreformanch@kunalpratap86@HemantSorenJMM@The_FollowUp@Tigerjairam
झारखंड में छात्र आंदोलन का पूरा जोर उन नियुक्तियों को रद्द कराने पर है, जो हो चुकी हैं।
व्यक्तिगत खुन्नस और कुंठा में किसी की नौकरी चली जाए,मानो यही सबसे बड़ी उपलब्धि हो।
लेकिन सवाल यह है कि जो बेरोजगार अभी लाइन में खड़े हैं, उनका क्या?
उनके लिए न कोई नया विज्ञापन है,
न कोई परीक्षा कैलेंडर,
न नई नियुक्तियों की स्पष्ट योजना।
हजारों छात्र रोज किताब खोलते हैं, पढ़ते हैं, उम्मीद करते हैं कि शायद अगली परीक्षा उनकी जिंदगी बदल देगी।
लेकिन व्यवस्था उन्हें क्या दे रही है?
एक और इंतजार… एक और अनिश्चितता… और अंत में मायूसी।
सबसे दुखद यह है कि नौकरी पा चुके और नौकरी खो चुके लोगों की लड़ाई में
नौकरी की तैयारी कर रहा वह छात्र कहीं दिखाई ही नहीं दे रहा, जिसकी उम्र हर गुजरते साल के साथ निकलती जा रही है।
जिसे आज विज्ञापन चाहिए, उसे आंदोलन की राजनीति मिल रही है।
जिसे परीक्षा कैलेंडर चाहिए, उसे आरोप-प्रत्यारोप मिल रहे हैं।
जिसे भविष्य चाहिए, उसे सिर्फ आश्वासन और अनिश्चितता मिल रही है।
किसी की नौकरी छीनने की लड़ाई आसान है,
लेकिन हजारों युवाओं को नई नौकरी देने की लड़ाई कौन लड़ेगा?
@JPSCreformanch@HemantSorenJMM@BJP4Jharkhand@DevendraNathMa9@JLKMJHARKHAND
कैसे छात्र आंदोलन को एक कोचिंग माफिया गंगापार से आकर झारखंडी छात्रों को बरगला कर भाजपा नेताओं से सांठ गांठ कर आंदोलन को बर्बाद किया?
और भाजपा के इशारे पर कैसे ब्यूकरिंट तैयार किया?
छात्रों के सहारे राज्य के 24 जिलों में छात्रों आंदोलन के सहारे राजनीति कर सक!
@HemantSorenJMM@JMMKalpanaSoren@JmmJharkhand
जब फैसला कोर्ट ने दिया है तो गुस्सा मुख्यमंत्री पर क्यों? क्या यह आंदोलन छात्रों के हित में है या किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा?
भाजपा और उससे जुड़े कोचिंग माफिया छात्रों को आगे कर अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश कर रहे हैं।झारखंड के युवाओं के भविष्य के साथ राजनीति करना बंद कीजिए।
@JPSCreformanch@khurpenchh You didn’t win…. You made the students pay the price… dono taraf students hi hain… doshi abhi bhi Azaad hain… sarkar jeeti… Divide and conquer phir kaam kar gya.
@shaktilal94 Bewakoof insaan jinka tum mazak uda rhe ho woh tum me se hi hain… ye tumhari ya students ki jeet nhi sarkar ki jeet hai… accountability kahan hai sarkar ke nirnay me… doshi toh bach hi gye hain na…khamiyaza in any case students ko hi bharna hai… divide and conquer…remember
@lagatarIN These irregularities demand thorough investigation not some draconian decision making. It’s a clear attempt of avoiding accountability by the state government. Price is being paid by students.
@The_FollowUp Iss protest se nuksan sirf students ka hi hua ,.aur students samjha nhi .neta to iss baat ke liye kush hai ki humlogo ke khilaf kisi ne awaj nhi uthaya..
@The_FollowUp Our demand is simple: conduct a fair investigation into the 11th–13th JPSC, punish only those found guilty based on evidence, and protect the innocent. Collective punishment by cancelling the entire examination/appointments is not justified.