अगर हक़ के लिए लिख नहीं सकते तो कमसे कम हक़ के लिए लिखने वालों का ���ाथ दो।
आओ हम सब मिलकर उज्जैन की शाही मस्जिद को बचाने के लिए एक जुट हो��र लिखे…✍️
#SaveUjjainShahiMosque
जिनके अंदर पौरुष होता है वो सामने से लड़ते हैं, यूं छिपकर फेक आईडी और हैंडल्स से लड़ना बंद करे भाजपा
अगर पौरुष है, अगर दम है, तो खुलकर सामने से लड़े, दो दो हाथ करे, हम तैयार हैं, आइए और कीजिए AI वॉर, हम समाजवादी हैं खुलकर तैयार
फिलहाल सोशल मीडिया के लोग इस AI वीडियो का मजा लें
बुशरा बानो ने “अस्सलामुअलैकुम”, “इंशाअल्लाह” और “जज़ाकल्लाह” क्या कह दिया, कुछ लोगों को उनकी वर्दी और संविधान अचानक याद आ गया।
लेकिन यूपी में ऑन ड्यूटी धार्मिक जुलूस में गदा लेकर शामिल हुए CO अनुज चौधरी पर सवाल करने की बारी आती है तो वही लोग चुप्पी साध लेते हैं।
धर्म के ��ब्दों से इतनी परेशानी है तो वर्दी में धार्मिक प्रदर्शन पर भी सवाल उठाइए।
निष्पक्षता सिर्फ़ एक तरफ़ के लिए नहीं होती।
अगर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो प्रोटेस्ट करेंगे: मुस्लिम पत्रकारों के समर्थन में उतरी AISA अध्यक्ष नेहा.
#DelhiPolice#Muslim#Women#Neha
मुस्लिम होने की वजह से क्या एक महिला पत्रकार को दोगुना-तिगुना पीटा जाएगा?
क्या इस देश में मुसलमान होना गुनाह हो गया है?
पुलिस की इस बर्बरता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। कानून सबके लिए बराबर है।
#Muslim #Journalist #PoliceBrutality
मुस्लिम बस्तियों में घुसते ही जुलूस की अकड़ सातवें आसमान पर होती है हाथों में हथियार, तलवारें, नारे, उकसावे और शक्ति प्रदर्शन खुलकर होता है।
लेकिन मुसलमान अगर अपनी जान-माल की हिफाज़त में, जिसकी इजाज़त ��ंविधान देता है, पलटकर खड़ा हो जाए, तो उसी पर मुकदमे, NSA-UAPA, बुलडोज़र और एनकाउंटर की तलवार लटक जाती है।
हथियार लेकर जुलूस निकालना ताकत है और अपनी हिफाज़त में खड़ा होना अपराध?
फिर कानून सबके लिए बराबर कहाँ है?
क्या हिन्दू राष्ट्र घोषित हो गया? क्या संविधान खत्म कर दिया गया?
क्या मनुस्मृति लागू हो गई?
इस वीडियो को देखकर क्या मोहन भागवत जी अपनी बात रखेंगे? या फिर वही कहेंगे कि जो मुसलमानों का विरोध करे, वह हिंदू नहीं हो सकता?
अगर किसी महिला को बुर्का पहनकर अस्पताल जाने से रोका गया है, तो सवाल है—ऐसा आदेश किसने दिया, और किस अधिकार के तहत?
इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर लाइक रिपोस्ट करें, ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पुलिसकर्मियों व प्रशासनिक अधिकारियों पर उचित कार्रवाई हो।👇
📍कश्मीर
अमरनाथ यात्रा के दौरान फल बेच रहे कश्मीरी मुस्लिम बच्चों को ₹10-₹10 देने का लालच देकर “भारत माता की जय” बोलने के ��िए कहा गया।
बच्चों के इनकार के बावजूद बार-बार दबाव बनाया गया “हिंदुस्तान में रहते हो तो जयकार करनी चाहिए।”
मासूम बच्चों को पैसे का लालच देकर अपनी पसंद के नारे लगवाना और उनकी मजबूरी का फायदा उठाना बेहद शर्मनाक है।
📍बरेली, उत्तर प्रदेश
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मारूफ रज़ा खान ने तौहीद के हवाले से कुरआन की सूरह अल-इख़लास (112:3-4) की आयत का ज़िक्र किया—
“न उसकी कोई औलाद है और न वो किसी की औलाद है, और न कोई उसके बराबर है।”
उन्होंने कहा कि ज़मीन-ओ-आसमान और इस कायनात की तमाम मख़लूक उसी की बनाई हुई है। वही इस पूरी कायनात का मालिक और पैदा करने वाला है।
इसी बयान के बाद बरेली पुलिस ने धार्मिक भावनाएं आहत करने के इल्ज़ाम में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
📍 हापुड़, उत्तर प्रदेश
GS मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में नमाज़ पढ़ रही एक मुस्लिम महिला को कथित तौर पर परेशान करने का मामला सामने आया है।
आरोप है कि सौरभ प्रताप ने मोबाइल ���र YouTube से हनुमान चालीसा चलाकर महिला का वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया।
धार्मिक आस्था का सम्मान सभी का अधिकार है अस्पताल जैसे स्थान पर किसी को भी दूसरे की इबादत में खलल डालने की इजाज़त नहीं होनी चाहिए।
ट्रेन में दाढ़ी-टोपी पहने मुस्लिम यात्री ने आरोप लगाया कि पत्नी के ऑपरेशन और अपनी कमर की तकलीफ़ बताने के ���ावजूद उसकी मजबूरी का मज़ाक उड़ाया गया और उससे बदसलूकी की गई। सवाल यह है कि क्या अब बीमार और लाचार यात्री के साथ भी इंसानियत नहीं बची?
मुसलमान अगर सड़क पर पाँच मिनट नमाज़ पढ़ ले तो सबको तकलीफ़ हो जाती है, लेकिन जब सड़क पर तोड़फोड़ हो, गाड़ियों को नुकसान पहुँचाया जाए और घंटों हंगामा किया जाए, तब किसी को तकलीफ़ क्यों नहीं होती? कानून का पैमाना सबके लिए एक जैसा होना चाहिए।
I come from two Indias.
एक भारत वो है, जहाँ पुलिस वर्दी में कांवड़ उठाकर गंगाजल भरने जाना आस्था की अभिव्यक्ति माना जाता है।
और दूसरा भारत वो है, जहाँ बागपत के SI इंतसार अली को दाढ़ी रखने पर निलंबित किया जाता है, TSI अफाक खान पर धार्मिक संदर्भ देने पर विभागीय कार्रवाई होती है, और जी. अब्दुल खादर इब्राहिम को भी अपनी दाढ़ी के कारण सज़ा झेलनी पड़ती है।
जब आस्था की इज़्ज़त और नियमों का पैमाना पहचान देखकर बदलने लगे, तो समझ लीजिए सवाल सिर्फ़ वर्दी का नहीं, बल्कि बराबरी के सिद्धांत का है।
#AllEyesOnIndianMuslim
नेपाल से लगातार मुस्लिम विरोध�� लिंच करने की कोशिश की तस्वीर आ रही है _
Nepal सुनसरी कप्तानगंज इलाके से मुस्लिम
लड़का बाइक पर दो महिलाओं को लेकर जा रहा था
तभी दहशत करने वाले चरम क���्टर लोगों ने
हमला किया मारा पीटा, उनकी टोपी लाठी पर
रखकर जलाई जश्न मनाया।
नेपाल प्रधानमंत्री बालेन शाह एक बात याद
रखिए दुनिया भर में हर समुदाय कहीं न कहीं
अल्पसंख्यक हैं , इस तरह मारना पीटना
धर्म जात के नाम पर शर्म आना चाहिए
चुल्लू भर नफरत में डूब जाना चाहिए।
उम्मीद एक बहुत बड़े gen z movement के
बाद आप सरकार में आए हो नफरत को पनपने
नहीं देंगे
#NepalAgainstHate
india's MP, Bhopal City,
The police misbehaved with a Muslim family in Bhopal, Madhya Pradesh, pushed the elderly man and it is alleged that the policeman also beat him up... The victim's family had come to file an FIR for the assault but the police misbehaved with them. More Detail In video