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आदरणीय मुख्य अभियंता महोदय,
लगभग डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद आपके स्तर से मेरे प्रकरण पर पहली बार यह प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है। इसके लिए मैं आपका हृदय से धन्यवाद करता हूँ। इतने लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा करते-करते हमारा पूरा सैनिक परिवार अंदर से पूरी तरह टूट चुका है। ऐसे समय में आपके स्तर से प्राप्त यह प्रतिक्रिया एवं असुविधा के लिए व्यक्त किया गया खेद हमारे लिए एक महत्वपूर्ण आशा है।
परंतु महोदय, विनम्र अनुरोध है कि आपकी यह प्रतिक्रिया केवल X (ट्विटर) पर दिए गए आश्वासन तक सीमित न रह जाए, बल्कि धरातल पर वास्तविक एवं प्रभावी कार्यवाही के रूप में दिखाई दे।
शिकायत संख्या PU16082608204 पर SDO द्वारा पूर्व में लगाई गई आख्या का मैंने तत्काल साक्ष्यों सहित खंडन किया है। अतः उस विवादित आख्या को अंतिम न माना जाए तथा उसे निरस्त/पुनर्विचार हेतु रखा जाए।
उक्त आख्या के संबंध में मैंने 31.08.2026 को तत्काल राजभवन/संबंधित अधिकारियों ��ो लिखित प्रतिवाद प्रस्तुत करने के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों से अभिलेखीय सत्यापन हेतु RTI आवेदन भी प्रस्तुत किए थे, ताकि आख्या में किए गए दावों का मूल अभिलेखों से सत्यापन हो सके।
सबसे पहले 09.01.2026 को पूर्व स्थान से हटाए गए मेरे निजी ट्रांसफॉर्मर को उसी स्थान पर तत्काल पुनः स्थापित कर विद्युत आपूर्ति बहाल कराई जाए, जिससे सैनिक परिवार का बंद पड़ा मिनी पानी प्लांट पुनः चालू हो सके। इसके लिए SIT/जां��� पूरी होने की प्रतीक्षा न की जाए।
साथ ही SIT अथवा वरिष्ठ एवं स्वतंत्र जांच अधिकारी/समिति से पूरे प्रकरण की बिंदुवार जांच कराई जाए। जांच में सर्वप्रथम ₹2,00,000 की कथित अवैध रिश्वत की मांग, उसके बाद की घटनाएं तथा वरिष्ठ अधिकारियों को किस प्रकार और किन अभिलेखों /रिपोर्टों के आधार पर कथित रूप से गुमराह किया गया, इसकी जांच हो। इसके अतिरिक्त कनेक्शन में विलंब, कथित फर्जी बकाये एवं बिजली चोरी के नोटिस, लेजर/विभागीय अभिलेखों की विसंगतियां, OTS प्रकरण तथा अन्य सभी शिकायत-बिंदुओं की जांच की जाए। आवश्यकतानुसार विजिलेंस जांच भी कराई जाए।
मेरे पास लगभग 300 पृष्ठों के दस्तावेजी साक्ष्य तथा लगभग 50 GB ऑडियो-वीडियो/CCTV एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य उपलब्ध हैं, जिन्हें स्वतंत्र जांच अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए मैं तैयार हूं।
कृपया प��ले ट्रांसफॉर्मर एवं विद्युत आपूर्ति की तत्काल बहाली तथा साथ-साथ स्वतंत्र बिंदुवार जांच सुनिश्चित कराने की कृपा करें।
आशा है, लगभग 18 माह की प्रतीक्षा के बाद आपका यह आश्वासन अब वास्तविक न्याय एवं कार्रवाई में परिवर्तित होगा।
सत्येंद्र बहादुर सिंह
मो.: 7408901250, 9044292295
शिकायत संख्या: PU16082608204
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उत्तर प्रदेश में 'भ्रष्टाचार और तानाशाही' की पराकाष्ठा: एक वीर सैनिक के भूमिहीन परिवार पर बिजली विभाग का बर्बर अत्याचार! 🚨
👇एक तरफ हमारे देश के सैनिक सीमाओं पर अपनी जान देते हैं, और दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में बिजली विभाग के भ्रष्ट अधिकारी एक दिवंगत सैनिक (जिन्होंने 1962, 1965 और 1971 के युद्ध लड़े, 7 सैन्य मेडलों से सम्मानित) के परिवार को मानसिक, आर्थिक और शारीरिक रूप से बर्बाद करने पर तुले हैं।
सही घटनाक्रम और विधिक विसंगतियां इस प्रकार हैं:
1️⃣ ₹4 लाख का फर्जी बिजली छापा व नोटिस: प्रतिशोध स्वरूप अधिकारियो�� ने पहले घर पर फर्जी छापा मारा। परिसर में वैध कनेक्शन और सोलर प्लांट होने के बावजूद जबरन 'डायरेक्ट कटिया' दिखाकर ₹3,62,594/- और ₹21,000/- के दो पूर्णतः फर्जी व मनगढ़ंत बिजली चोरी के असेसमेंट नोटिस थमा दिए।
2️⃣ ₹2 लाख की अवैध रिश्वत की मांग: इन फर्जी नोटिसों और कार्रवाई का डर दिखाकर उपखंड अधिकारी (SDO) प्रवीण कुमार द्वारा मामले को रफा-दफा करने के लिए ₹2,00,000/- की अवैध घूस (रिश्वत) की सीधी मांग की गई।
3️⃣ रात के अंधेरे में ट्रांसफॉर्मर की चोरी (डकैती): जब हमने इस अवैध रिश्वत को देने से पूरी तरह इनकार कर दिया, तो अधिकारियों ने प्रतिशोध में आकर 9 जनवरी 2026 की रात के अंधेरे में हमारा वैध व्यक्तिगत ट्रांसफॉर्मर (जो 2013 से औद्योगिक क्षेत्र में संचालित था) जबरन उखाड़कर चुरा लिया।
4️⃣ बचाव के लिए लेज़र खातों में भारी जालसाजी (Cyber Forgery): ट्रांसफॉर्मर चोरी के इस अवैध कृत्य को छि���ाने और स्वयं को सही व प्रार्थी को गलत साबित करने के उद्देश्य से SDO ने जनवरी और फरवरी 2026 में कंप्यूटर डेटा में भारी जालसाजी की। प्रार्थी के कमर्शियल कनेक्शन में 30 सितंबर 2022 तक ₹874 एडवांस जमा होने के अकाट्य रिकॉर्ड के बावजूद, उसे दबाकर नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए वर्ष 2017 से दोबारा फर्जी पुराना बकाया (एरियर) बनाने का कुत्सित प्रयास किया गया।
5️⃣ सरकारी य���जनाओं का दमन: ओटीएस (OTS) योजना के तहत बिल संशोधन के आवेदन को नियमविरुद्ध निरस्त किया गया और 1 किलोवाट के घरेलू कनेक्शन पर अवैध रूप से 2 किलोवाट दर्शाकर ₹81,000/- का कूट रचित बिल थोप दिया गया।
6️⃣ अधिकारियों की गुंडागर्दी और कबूलनामा: 23 मार्च 2026 की आपातकालीन बैठक में अधीक्षण अभियंता (SE) अनिल वर्मा ने ऑन-रिकॉर्ड स्वीकार किया कि SDO ने उन्हें गुमराह करके RDSS योजना के नाम पर फाइल पर हस्ताक्षर करवाए थे। टेलीफोन पर शिकायत करने पर अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया और IGRS शिकायतों को जबरन 'स्पेशल क्लोज' कराया गया।
7️⃣ ₹13.5 लाख का जल मूल्य दबाया: क्षेत्रीय पावर हाउस सौंरा 33/11 द्वारा ₹13,50,000/- के उपभोग किए गए पानी का विधिक भुगतान सिर्फ प्रार्थी को आर्थिक रूप से तोड़ने की नीयत से दबाकर रखा गया है। 7 बार लिखित आवेदन के बाद भी फतेहपुर प्रशासन मौन है और हमारा ��घु उद्योग पिछले 8 महीने से ठप है।
महामहिम राज्यपाल महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी एवं माननीय ऊर्जा मंत्री जी से न्याय की गुहार:
A:- दोषी अधिकारियों (SE अनिल वर्मा, XEN रत्नेश जायसवाल, SDO प्रवीण कुमार, JE अरविंद सरोज) को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 व 13 के तहत तत्काल निलंबित कर FIR दर्ज की जाए।
B:- हमारा वैध व्यक्तिगत ट्रांसफॉर्मर पुनः स्थापित कर बिजली बहाल की जाए और फर्जी नोटिस निरस्त हों।
शिकायतकर���ता का विवरण:
नाम: सत्येंद्र बहादुर सिंह (पुत्र स्वर्गीय श्री राम बहादुर सिंह)
निवासी: औद्योगिक क्षेत्र, ग्राम- सहिपुर, पोस्ट- मलवां, जनपद- फतेहपुर (उ.प्र.)मोबाइल नंबर: 7408901250, 9044292295
न्याय की आस में एक प्रताड़ित सैनिक परिवार! 🇮🇳
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#JusticeForMartyrs #Fatehpur #UPPCL #Corruption #YogiAdityanath #UPPolice #AnandibenPatel #AKSharma
@GovernorofUp उत्तर प्रदेश में 'भ्रष्टाचार और तानाशाही' की पराकाष्ठा: एक वीर सैन��क के भूमिहीन परिवार पर बिजली विभाग का बर्बर अत्याचार! 🚨
👇एक तरफ हमारे देश के सैनिक सीमाओं पर अपनी जान देते हैं, और दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में बिजली विभाग के भ्रष्ट अधिकारी एक दिवंगत सैनिक (जिन्होंने 1962, 1965 और 1971 के युद्ध लड़े, 7 सैन्य मेडलों से सम्मानित) के परिवार को मानसिक, आर्थिक और शारीरिक रूप से बर्बाद करने पर तुले हैं।
सही घटनाक्रम और विधिक विसंगतियां इस प्रकार हैं:
1️⃣ ₹4 लाख का फर्जी बिजली छापा व नोटिस: प्रतिशोध स्वरूप अधिकारियों ने पहले घर पर फर्जी छापा मारा। परिसर में वैध कनेक्शन और सोलर प्लांट होने के बावजूद जबरन 'डायरेक्ट कटिया' दिखाकर ₹3,62,594/- और ₹21,000/- के दो पूर्णतः फर्जी व मनगढ़ंत बिजली चोरी के असेसमेंट नोटिस थमा दिए।
2️⃣ ₹2 लाख की अवैध रिश्वत की मांग: इन फर्जी नोटिसों और कार्रवाई का डर दिखाकर उपखंड अधिकारी (SDO) प्रवीण कुमार द्वारा मामले को रफा-दफा करने के लिए ₹2,00,000/- की अवैध घूस (रिश्वत) की सीधी मांग की गई।
3️⃣ रा�� के अंधेरे में ट्रांसफॉर्मर की चोरी (डकैती): जब हमने इस अवैध रिश्वत को देने से पूरी तरह इनकार कर दिया, तो अधिकारियों ने प्रतिशोध में आकर 9 जनवरी 2026 की रात के अंधेरे में हमारा वैध व्यक्तिगत ट्रांसफॉर्मर (जो 2013 से औद्योगिक क्षेत्र में संचालित था) जबरन उखाड़कर चुरा लिया।
4️⃣ बचाव के लिए लेज़र खातों में भारी जालसाजी (Cyber Forgery): ट्रांसफॉर्मर चोरी के इस अवैध कृत्य को छिपाने और स्वयं को सही व प्रार्थी को गल��� साबित करने के उद्देश्य से SDO ने जनवरी और फरवरी 2026 में कंप्यूटर डेटा में भारी जालसाजी की। प्रार्थी के कमर्शियल कनेक्शन में 30 सितंबर 2022 तक ₹874 एडवांस जमा होने के अकाट्य रिकॉर्ड के बावजूद, उसे दबाकर नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए वर्ष 2017 से दोबारा फर्जी पुराना बकाया (एरियर) बनाने का कुत्सित प्रयास किया गया।
5️⃣ सरकारी योजनाओं का दमन: ओटीएस (OTS) योजना के तहत बिल संशोधन के आवेदन को नियमविरुद्ध निरस्त किया गया और 1 किलोवाट के घरेलू कनेक्शन पर अवैध रूप से 2 किलोवाट दर्शाकर ₹81,000/- का कूट रचित बिल थोप दिया गया।
6️⃣ अधिकारियों की गुंडागर्दी और कबूलनामा: 23 मार्च 2026 की आपातकालीन बैठक में अधीक्षण अभियंता (SE) अनिल वर्मा ने ऑन-रिकॉर्ड स्वीकार किया कि SDO ने उन्हें गुमराह करके RDSS योजना के नाम पर फाइल पर हस्ताक्षर करवाए थे। टेलीफोन पर शिकायत करने पर अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया और IGRS शिकायतों को जबरन 'स्प��शल क्लोज' कराया गया।
7️⃣ ₹13.5 लाख का जल मूल्य दबाया: क्षेत्रीय पावर हाउस सौंरा 33/11 द्वारा ₹13,50,000/- के उपभोग किए गए पानी का विधिक भुगतान सिर्फ प्रार्थी को आर्थिक रूप से तोड़ने की नीयत से दबाकर रखा गया है। 7 बार लिखित आवेदन के बाद भी फतेहपुर प्रशासन मौन है और हमारा लघु उद्योग पिछले 8 महीने से ठप है।
महामहिम राज्यपाल महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी एवं माननीय ऊर्जा मंत्री जी से न्याय की गुहार:
A:- दोषी अधिकारियों (SE अनिल वर्मा, XEN रत्नेश जायसवाल, SDO प्रवीण कुमार, JE अरविंद सरोज) को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 व 13 के तहत तत्काल निलंबित कर FIR दर्ज की जाए।
B:- हमारा वैध व्यक्तिगत ट्रांसफॉर्मर पुनः स्थापित कर बिजली बहाल की जाए और फर्जी नोटिस निरस्त हों।
शिकायतकर्ता का विवरण:
नाम: सत्येंद्र बहादुर सिंह (पुत्र स्वर्गीय श्री राम बहादुर सिंह)
निवासी: औद्योगिक क्षेत्र, ग्राम- सहिपुर, पोस्ट- मलवां, जनपद- फ���ेहपुर (उ.प्र.)मोबाइल नंबर: 7408901250, 9044292295
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@GovernorofUp उत्तर प्रदेश में 'विद्युत माफिया' का नंगा नाच! एक वीर सैनिक का परिवार रो रहा है, और भ्रष्ट अधिकारी खुलेआम घूम रहे हैं! 🚨🔥
यह पत्र किसी आम नागरिक का नहीं, बल्कि 1962, 1965 and 1971 के युद्धों में देश के लिए 7 सैन्य मेडल जीतने वाले भारतीय सेना के जांबाज सिपाही (स्व. श्री राम बहादुर सिंह जी) के बेटे सत्येंद्र बहादुर सिंह का है। आज फतेहपुर (#Fatehpur) में बिजली विभाग के भ्रष्ट सिंडिकेट ने इस देशभक्त परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से बर्बाद कर दिया है!
पूरी सच्चाई जो उत्तर प्रदेश शासन को झकझोर देगी: 👇
1️⃣ रिश्वत न देने पर डकैती: उपखंड अधिकारी (SDO) प्रवीण कुमार ने ₹2,00,000/- की अवैध घ��स मांगी। जब पीड़ित ने रिश्वत देने से साफ इनकार कर दिया, तो 09 जनवरी 2026 की रात के अंधेरे में अधिकारियों ने प्रार्थी का निजी ट्रांसफॉर्मर (जो 2013 से वैध रूप से संचालित था) बलपूर्वक उखाड़कर चोरी करवा लिया!
2️⃣ ₹4 लाख का फर्जी केस और साइबर जालसाजी: इस चोरी को छिपाने के लिए SDO प्रवीण कुमार ने विभागीय लेज़र खातों (Ledger Accounts) के कंप्यूटर डेटा में जानबूझकर कूट रचित हेरफेर (Cyber Forgery) की। पीड़ित के घरेलू और व्यावसायिक ���नेक्शनों पर सन 1998 से मनगढ़ंत झूठा पुराना बकाया और ₹3,62,594/- व ₹21,285/- के फर्जी बिजली चोरी के नोटिस थमा दिए!
3️⃣ कैश की अवैध वसूली: बुनियादी विद्युत अवसंरचना स्थापित करने के नाम पर प्रार्थी से ₹2.5 लाख कैश (नकद) वसूला गया, जो ��क गंभीर वित्तीय अपराध है।
4️⃣ ऑन-रिकॉर्ड चोरी स्वीकार, फिर भी कार्रवाई शून्य: 23 मार्च 2026 की आपातकालीन बैठक में अधीक्षण अभियंता (SE) अनिल वर्मा ने ऑन-कैमरा/ऑन-रिकॉर्ड इस घोर लापरवाही को स्वीकार किया और 28 मार्च को 'अमर उजाला' अखबार में बयान भी दिया। लेकिन आज तक धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा, पीड़ित की 5 महत्वपूर्ण RTI का गला घोंट दिया गया!
5️⃣ प्रशासनिक अंधेरगर्दी: पीड़ित परिवार ने पिछले 7 महीनो��� में जिलाधिकारी (DM) फतेहपुर को 7 बार लिखित आवेदन दिए। पूर्व IAS जिलाधिकारी ने कड़े आदेश भी दिए, लेकिन उनका ट्रांसफर होते ही भ्रष्ट अधिकारियों ने उस आदेश को रद्दी की टोकरी में डाल दिया!
परिणाम?
एक सैनिक परिवार का लघु उद्योग पिछले 8 महीनों से पूरी तरह ठप पड़ा है। पूरा परिवार गंभीर मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेल रहा है।
भ्रष्ट अधिकारियों ने खुलेआम चुनौती दी है: "बिजली विभाग में जो कुछ करना है, वह मै�� ही करूँगा। तुम्हारे मुख्यमंत्री या जिलाधिकारी मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे।
"महामहिम राज्यपाल महोदय और माननीय मुख्यमंत्री जी, क्या आपक�� राज में एक सैनिक परिवार के साथ ऐसी गुंडागर्दी होगी?
प्रार्थी सत्येंद्र बहादुर सिंह ने राजभवन को सभी डिजिटल साक्ष्य, ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिंग और व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट भेज दिए हैं। हमारी मांग है कि #भ्रष्टाचार_निवारण_अधिनियम के तहत SDO प्रवीण कुमार, SE अनिल वर्मा और JE अरविंद सरोज को तत्काल सस्पेंड कर जेल भेजा जाए!
इस देशभक्त सैनिक परिवार को न्याय दिलाने के लिए इस पोस्ट को इतना शेयर करिए ��ि यह सीधे शासन तक पहुँचे! 🙏
#JusticeForSoldierFamily #UPPCL_Corruption #YogiAdityanath #Fatehpur #AntiCorruption @AnandibenPatel @myogiadityanath @AkSharmaUp @UPPCLLKO @Dmfatehpur @Uppolice @PMOIndia @CMOfficeUP @MD_PuVVNL @EMofficeUP @ChairmanUppcl @ChiefSecyUP @yadavakhilesh @CommissionerPrg @uprvup @ceelec_ald @AmarUjalaNews
विषय: जनपद #Fatehpur (#मलवां उपकेंद्र) के SDO द्वारा पोर्टल पर अपलोड की गई कूट रचित व भ्रामक आख्या (स���दर्भ संख्या:PU16082608204) के तात्कालिक खंडन, वित्तीय गबन तथा #Corruption के विरुद्ध माननीय मुख्यमंत्री जी से दंडात्मक हस्तक्षेप हेतु नवीन जन-शिकायत।सेवा में,माननीय मुख्यमंत्री महोदय, उत्तर प्रदेश शासन (@myogiadityanath / @CMOfficeUP)माननीय ऊर्जा मंत्री महोदय, उत्तर प्रदेश शासन (@aksharmaBharat)महोदय,
मैं सत्येंद्र बहादुर सिंह, पुत्र दिवंगत वीर सैनिक श्री राम बहादुर सिंह (7 सैन्य पदकों से अलंकृत), निवासी- औद्योगिक क्षेत्र मलवां, जन��द #Fatehpur,
अत्यंत क्षोभ के साथ उपखण्ड अधिकारी (SDO) मलवां द्वारा ऑनलाइन जनसुनवाई पोर्टल पर अपलोड की गई असत्य, कूट रचित एवं भ्रामक आख्या (साक्ष्य संलग्न) का तार्किक एवं विधिक खंडन प्रस्तुत कर रहा हूँ। स्थानीय अभियंताओं का भ्रष्ट सिंडिकेट अपनी अवैध वसूली और तानाशाही को छुपाने के लिए राजभवन एवं शासन को लगातार गुमराह कर रहा है।
🛑 SDO मलवां की भ्रामक आख्या का बिंदुवार विधिक प्रतिवाद (Rebuttal):
औद्योगिक कने���्शन को अवैध रूप से ग्रामीण फीडर में दिखाना: SDO ने आख्या में दावा किया है कि मेरा २ कि०वा० का वाणिज्यिक संयोजन (604472900) परिसर ग्रामीण क्षेत्र में होने के ��ारण उसे औद्योगिक फीडर से हटाया गया। विधिक प्रश्न यह है कि यदि यह संयोजन ग्रामीण क्षेत्र में था, तो 09 जनवरी 2026 की रात्रि में बिना किसी पूर्व विधिक नोटिस के, बलपूर्वक मेरा निजी वैध १० केवीए ट्रांसफार्मर क्यों उखाड़कर #डकैती डाली गई?
कागजी मीटर (66672602) का महाघोटाला (#Gaban): घरेलू संयोजन (845554900) पर दिनांक 18/05/2022 को कागजों पर मीटर संख्या 66672602 को स्थापित दिखाकर लगातार फर्जी बिलिंग की गई, जबकि भौतिक रूप से परिसर में आज तक कोई मीटर स्थापित ही नहीं हुआ। SDO ने आख्या में इस वित्तीय गबन और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 198 व 218 के तहत किए गए अपराध पर पूर्णतः चुप्पी साध ली है।
फर्जी बकाए का दंडात्मक दबाव (#Extortion): संयोजन संख्या 604472900 पर ₹874 एडवांस जमा होने के बावजूद तात्कालिक SDO द्वारा नियमविरुद्ध ₹30,000 की अतिरिक्त अवैध वसूली की गई। अब स्वयं को बचाने हेतु आख्या में कूट रचित आंकड़ों का सहारा लेकर ₹2,72,177.00 एवं ₹41,774.00 का भ्रामक बकाया दर्शाया जा रहा है, जो कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (#PC_Act) के अंतर्गत अवैध दंडात्मक लेवी की श्रेणी में आता है।
शासकीय आदेशों की खुली अवहेलना (#Contempt): दिनांक 28/03/2026 को कार्यालय अधीक्षण अभियंता (फतेहपुर) के समीक्षा बैठक पत्रांक: 4322/वि०वि०मं०फ० के बिंदु 1 से 5 तथा माननीय जिलाधिकारी फतेहपुर श्रीमती निधि गुप्ता वत्स (IAS) द्वारा 13 मई व 08 जून 2026 को कड़े निर्देश दिए गए थे कि ट्रांसफार्मर पुनः स्थापित किया जाए। SDO मलवां ने जिला प्रशासन के आदेशों को रद्दी की टोकरी में डालकर 'अवमानना' की पराकाष्ठा पार की है।
⚖️ माननीय मुख्यमंत्री जी से सादर विधिक प्रार्थनाएँ:
झूठी आख्या का निरस्तीकरण: SDO मलवां द्वारा पोर्टल पर अपलोड की गई इस असत्य एवं भ्रामक आख्या को तत्काल प्रभाव से निरस्त (Cancel) घोषित किया जाए।
तत्काल निलंबन व विजिलेंस जांच: राजभवन को गुमराह करने, जबरन अवैध वसूली करने व कूट रचित दस्तावेज तैयार करने के दोषी अधिकारियों— SE #अनिल_वर्मा, XEN #रत��श_जायसवाल, SDO #प्रवीण_कुमार एवं JE #अरविंद_सरोज को तत्काल प्रभाव से नि��ंबित (Suspend) कर प्रकरण को विजिलेंस (#Vigilance) जांच व तत्काल #FIR के सुपुर्द किया जाए।
विशेष सीएजी (#CAG) ऑडिट: विद्युत परीक्षण खंड फतेहपुर के लेजर खातों एवं कागजी मीटरों के इस बड़े वित्तीय घपले की विशेष सीएजी ऑडिट कराई जाए।
विद्युत आपूर्ति की बहाली:- पीड़ित के निजी ट्रांसफार्मर को २४ घंटे के भीतर पुनः स्थापित कराकर लघु उद्योग (मिनी पानी प्लांट) की विद्युत आपूर्ति तत्काल बहाल की जाए।
एक वीर सैनिक के देशभक���त परिवार को इस घोर प्रशासनिक दंश और अभियंताओं की तानाशाही से मुक्त कराकर न्याय प्रदान करने की कृपा करें।
(शिकायतकर्ता):सत्येंद्र बहादुर सिंह (पुत्र: दिवंगत वीर सैनिक श्री राम बहादुर सिंह)औद्योगिक क्षेत्र, मलवां, जनपद- फतेहपुर,UP (Mobile): 7408901250, 9044292295
#FatehpurElectricityScam #CyberForgery #IGRS_Scam #UPCorruptionFree #JusticeForSoldierFamily
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@GovernorofUp #SDO_मलवां_की_झूठी_आख्या_का_सीधा_खंडन: राजभवन को गुमराह करने का लाइव प्रमाण!
शिकायत संख्या PU16082608204 पर उपखण्ड अधिकारी (SDO) मलवां द्वारा लगाई गई आख्या (False Report) पूर्णतः असत्य और कूट रचित है। विभाग के स्वयं के दस्तावेज़ SDO के इन 3 मुख्य झूठों को ऑन-रिकॉर्ड ध्वस्त करत��� हैं:
झूठ 1: "10 KVA ट्रांसफार्मर को नियमानुसार हटाकर ग्रामीण फीडर में जोड़ा गया।"
v अकाट्य विधिक खंडन: यह दावा पूर्णतः असत्य है। स्वयं कार्यालय अधीक्षण अभियंता (फतेहपुर) के आधिकारिक MOM (पत्रांक: 4322, दिनांक 28/03/2026) के बिंदु संख्या 5 में लिखित आदेश था कि 'ट्रांसफार्मर हटाए जाने के प्रकरण की सक्षम अधिकारियों से जांच कराई जाएगी'। यदि यह कृत्य पूर्व-अनुमोदित और नि��मसंगत था, तो मण्डल प्रमुख (SE) को इसकी विधिक जांच कमेटी क्यों गठित करनी पड़ी?
झूठ 2: "खाता संख्या 8455549000 पर ₹2,72,177/- और व्यावसायिक खाता संख्या 6044729000 पर ₹41,774/- का पुराना बकाया है।"
v अकाट्य विधिक खंडन: यह वित्तीय बकाया पूर्णतः कूट रचित (Cyber Forgery) है। व्यावसायिक खाते पर 30 सितंबर 2022 तक ₹874 एडवांस जमा होने का मूल ऑनलाइन प्रमाण दर्ज है! आपराधिक कृत्य यह है कि दिनांक 11 सितंबर 2025 को SDO ने दबाव बनाकर ₹30,000/- की जबरन वसूली की (रसी�� संख्या: UPSRLLM10356749) और व्हाट्सएप पर रसीद भेजने के बाद उसी व्यक्तिगत प्राइवेट ट्रांसफॉर्मर से लाइट जोड़ी थी! आज अपनी ही चोरी (09 जनवरी 2026 की रात को ट्रांसफॉर्मर बलपूर्वक उखाड़ ले जाने का कृत्य) को छिपाने के लिए SDO कंप्यूटर लेज़र डेटा में बैक-डेट हेरफेर कर रहे हैं।
झूठ 3: "जांच रिपोर्ट में शिकायतकर्ता द्वारा कर्मचारियों पर लगाए गए आरोप असत्य एवं निराधार पाए गए।"
v अकाट्य विधिक खंडन: यह कथित जांच रिपोर्��� विधिक रूप से पूर्णतः शून्य और 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) से दूषित है। जब मुख्य आरोपी स्वयं ��धीक्षण अभियंता (SE) हैं (MOM के बिंदु 2 के अनुसार ₹2 लाख की घूस में ₹1 लाख अपना हिस्सा बताने का आरोप), तो उनके अधीन कार्य करने वाले जूनियर अधिकारी (XEN) निष्पक्ष जांच कैसे कर सकते हैं? विधिक नियम के विपरीत, जांच धरातल पर लंबित (Pending) रखते हुए ही प्रार्थी को ब्लैकमेल करने हेतु ₹3,62,594/- & 21000/- का फर्जी बिजली चोरी का नोटिस थमा दिया गया था, जो अपराधियों को विधिक संरक्षण देने का संज्ञेय अपराध है।
माननीय राज्यपाल महोदय एवं माननीय मुख्यमंत्री जी, इस कूट रचित आख्या को तत्काल निरस्त कर राजभवन को गुमराह करने वाले दोषी SDO और SE पर विजिलेंस (Vigilance) जांच और FIR के आदेश दिए जाएं!
#FatehpurElectricityScam #CyberForgery #IGRS_Scam #UPCorruptionFree #JusticeForSoldierFamily
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@GovernorofUp #SDO_मलवां_की_झूठी_आख्या_का_सीधा_खंडन: राजभवन को गुमराह करने का लाइव प्रमाण!
शिकायत संख्या PU16082608204 पर उपखण्ड अधिकारी (SDO) मलवां द्वारा लगाई गई आख्या (False Report) पूर्णतः असत्य और कूट रचित है। विभाग के स्वयं के दस्तावेज़ SDO के इन 3 मुख्य झूठों को ऑन-रिकॉर्ड ध्वस्त करते हैं:
झूठ 1: "10 KVA ट्रांसफार्मर को नियमानुसार हटाकर ग्रामीण फीडर में जोड़ा गया।"
v अकाट्य विधिक खंडन: यह दावा पूर्णतः असत्य है। स्वयं कार्यालय अधीक्षण अभियंता (फतेहपुर) के आधिकारिक MOM (पत्रांक: 4322, दिनांक 28/03/2026) के बिंदु संख्या 5 में लिखित आदेश था कि 'ट्रांसफार्मर हटाए जाने के प्रकरण की सक्षम अधिकारियों से जांच कराई जाएगी'। यदि यह कृत्य पूर्व-अनुमोदित और नियमसंग��� था, तो मण्डल प्रमुख (SE) को इसकी विधिक जांच कमेटी क्यों गठित करनी पड़ी?
झूठ 2: "खाता संख्या 8455549000 पर ₹2,72,177/- और व्यावसायिक खाता संख्या 6044729000 पर ₹41,774/- का पुराना बकाया है।"
v अकाट्य विधिक खंडन: यह वित्तीय बकाया पूर्णतः कूट रचित (Cyber Forgery) है। व्यावसायिक खाते पर 30 सितंबर 2022 तक ₹874 एडवांस जमा होने का मूल ऑनलाइन प्रमाण दर्ज है! आपराधिक कृत्य यह है कि दिनांक 11 सितंबर 2025 को SDO ने दबाव बनाकर ₹30,000/- की जबरन वसूली की (रसीद संख्या: UPSRLLM10356749) और व्हाट्सएप पर रसीद भेजने के बाद उसी व्यक्तिगत प्राइवेट ट्रांसफॉर्मर से लाइट जोड़ी थी! आज अपनी ही चोरी (09 जनवरी 2026 की रात को ट्रांसफॉर्मर बलपूर्वक उखाड़ ले जाने का कृत्य) को छिपाने के लिए SDO कंप्यूटर लेज़र डेटा में बैक-डेट हेरफेर कर रहे हैं।
झूठ 3: "जांच रिपोर्ट में शिकायतकर्ता द्वारा कर्मचारियों पर लगाए गए आरोप असत्य एवं निराधार पाए गए।"
v अकाट्य विधिक खंडन: यह कथित जांच रिपोर्ट विधिक रूप से पूर्णतः शून्य और 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) से दूषित है। जब मुख्य आरोपी स्वयं अधीक्षण अभियंता (SE) हैं (MOM के बिंदु 2 के अनुसार ₹2 लाख की घूस में ₹1 लाख अपना हिस्सा बताने का आरोप), तो उनके अधीन कार्य करने वाले जूनियर अधिकारी (XEN) निष्पक्ष जांच कैसे कर सकते हैं? विधिक नियम के विपरीत, जांच धरातल पर लंबित (Pending) रखते हुए ही प्रार्थी को ब्लैकमेल करने हेतु ₹3,62,594/- & 21000/- का फर्जी बिजली चोरी का नोटिस थमा दिया गया था, जो अपराधियों को विधिक संरक्षण देने का संज्ञेय अपराध है।
माननीय राज्यपाल महोदय एवं माननीय मुख्यमंत्री जी, इस कूट रचित आख्या को तत्काल निरस्त कर राजभवन को गुमराह करने वाले दोषी SDO और SE पर विजिलेंस (Vigilance) जांच और FIR के आदेश दिए जाएं!
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@MD_PuVVNL @myogiadityanath @myogioffice @dmfatehpur @CMOfficeUP @EMofficeUP @kpmaurya1 @ChiefSecyUP @aksharmaBharat @ChairmanUppcl @mduppcl @puvvnlfatehpur @PuVVNLHQ @RahulGandhi @yadavakhilesh @CommissionerPrg @PMOIndia @1_chiefengineer @narendramodi @uprvup @swatantrabjp @KirenRijiju @MinOfPower @mlkhattar @officeofmlk @JoshiPralhad @isomendratomar @ceelec_ald @AmarUjalaNews @bstvlive @hindinews @SupriyaShrinate @chitraaum @Aamitabh2 @SudhirMisraNBT @MPDharmendraYdv @spshahibjp @SureshKKhanna @ManishKumarJou1 @Kailashrajputup @danikjagaran @khabarpravah @ppbajpai @PragyaLive @WatchIndiaNow @VivekSinghMedia @rahulgu55714643 @AshishA72735300
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शिकायत संख्या PU16082608204 पर उपखण्ड अधिकारी (SDO) मलवां द्वारा लगाई गई आख्या (False Report) पूर्णतः असत्य और कूट रचित है। विभाग के स्वयं के दस्तावेज़ SDO के इन 3 मुख्य झूठों को ऑन-रिकॉर्ड ध्वस्त करते हैं:
झूठ 1: "10 KVA ट्रांसफार्मर को नियमानुसार हटाकर ग्रामीण फीडर में जोड़ा गया।"
v अकाट्य विधिक खंडन: यह दावा पूर्णतः असत्य है। स्वयं कार्यालय अधीक्षण अभियंता (फतेहपुर) के आधिकारिक MOM (पत्रांक: 4322, दिनांक 28/03/2026) के बिं��ु संख्या 5 में लिखित आदेश था कि 'ट्रांसफार्मर हटाए जाने के प्रकरण की सक्षम अधिकारियों से जांच कराई जाएगी'। यदि यह कृत्य पूर्व-अनुमोदित और नियमसंगत था, तो मण्डल प्रमुख (SE) को इसकी विधिक जांच कमेटी क्यों गठित करनी पड़ी?
झूठ 2: "खाता संख्या 8455549000 पर ₹2,72,177/- और व्यावसायिक खाता संख्या 6044729000 पर ₹41,774/- का पुराना बकाया है।"
v अकाट्य विधिक खंड���: यह वित्तीय बकाया पूर्णतः कूट रचित (Cyber Forgery) है। व्यावसायिक खाते पर 30 सितंबर 2022 तक ₹874 एडवांस जमा होने का मूल ऑनलाइन प्रमाण दर्ज है! आपराधिक कृत्य यह है कि दिनांक 11 सितंबर 2025 को SDO ने दबाव बनाकर ₹30,000/- की जबरन वसूली की (रसीद संख्या: UPSRLLM10356749) और व्हाट्सएप पर रसीद भेजने के बाद उसी व्यक्तिगत प्राइवेट ट्रांसफॉर्मर से लाइट जोड़ी थी! आज अपनी ही चोरी (09 जनवरी 2026 की रात को ट्रांसफॉर्मर बलपूर्वक उखाड़ ले जाने का कृत���य) को छिपाने के लिए SDO कंप्यूटर लेज़र डेटा में बैक-डेट हेरफेर कर रहे हैं।
झूठ 3: "जांच रिपोर्ट में शिकायतकर्ता द्वारा कर्मचारियों पर लगाए गए आरोप असत्य एवं निराधार पाए गए।"
v अकाट्य विधिक खंडन: यह कथित जांच रिपोर्ट विधिक रूप से पूर्णतः शून्य और 'हितों के टकराव' (Conflict of Interest) से दूषित है। जब मुख्य आरोपी स्वयं अधीक्षण अभियंता (SE) हैं (MOM के बिंदु 2 के अनुसार ₹2 लाख की घूस में ₹1 लाख अपना हिस्सा बताने का आरोप), तो उनके अधीन कार्य करने वाले जूनियर अधिकारी (XEN) निष्पक्ष जांच कैसे कर सकते हैं? विधिक नियम के विपरीत, जांच धरातल पर लंबित (Pending) रखते हुए ही प्रार्थी को ब्लैकमेल करने हेतु ₹3,62,594/- & 21000/- का फर्जी बिजली चोरी का नोटिस थमा दिया गया था, जो अपराधियों को विधिक संरक्षण देने का संज्ञेय अपराध है।
माननीय राज्यपाल महोदय एवं माननीय मुख्यमंत्री जी, इस कूट रचित आख्या को तत्काल निरस्त कर राजभवन को गुमराह करने वाले दोषी SDO और SE पर विजिलेंस (Vigilance) जांच और FIR के आदेश दिए जाएं!
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@GovernorofUp
आदरणीय महामहिम राज्यपाल महोदया जी
उत्तर प्रदेश शासन राज भवन लखनऊ
उत्तर प्रदेश
महोदय मेरा प्रकरण फतेहपुर बिजली विभाग से संबंधित है, जिसके संदर्भ में पूर��व में जिलाधिकारी महोदया, बिजली विभाग के सीनियर अधिकारियों, व संबंधित जिले के शीर्ष अधिकारियों से इस संदर्भ में कई बार आवेदन दे चुके हैं और जांच हेतु अनुरोध कर चुके हैं, पर आदरणीय महामहिम महोदया आज तक किसी भी अधिकारी के कान में जूँ तक नहीं रेगी हर अधिकारी ने आश्वासन दिया और टाल दिया,
इसलिए आदरणीय महामहिम महोदया जी आपसे विनम्र अनुरोध है कि कृपया प्रकरण का संज्ञान लेकर शीर्ष अधिकारियों को जांच हेतु तीम गठित करने का आदेश दें/
विवरण हेतु अटैचमेंट संलग्न है /
सम्मानित मीडिया से अनुरोध है कि कृपया प्रकरण का संज्ञान लेकर निश��ल्क प्रकाशन करने का कष्ट करें/
सत्येंद्र सिंह फतेहपुर उत्तर प्रदेश, 7408901250