समीर की मौत के बाद भी खामोश क्यों है @Flipkartminutes ? साइकिल, जूते और बैग कई सवाल खड़े कर रहे हैं!
मैं समीर हुसैन के मामले में फ्लिपकार्ट मिनट के स्टोर पर पहुंची। कोशिश थी कि जिम्मेदार लोगों से बात करूं, कुछ सवालों के जवाब मिलें, लेकिन कोई भी खुलकर बात करने को तैयार नहीं है।
स्टोर में मौजूद एक शख्स का कहना है कि समीर उस दिन ड्यूटी पर नहीं आया था। वहीं, कुछ राइडर्स का दावा है कि समीर ड्यूटी पर आया था और उसने एक-दो डिलीवरी भी की थीं।
अब सवाल है कि सच क्या है?
स्टोर के बाहर समीर की साइकिल खड़ी है, बेंच के नीचे उसके जूते पड़े हैं और स्टोर के अंदर उसका बैग रखा है। राइडर्स के मुताबिक, ये चीजें 5 अक्टूबर से वहीं हैं। आज 21 अक्टूबर है, लेकिन इन सवालों पर स्टोर के जिम्मेदार लोगों की तरफ से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
आखिर समीर के साथ उस दिन क्या हुआ था?
अगर समीर ड्यूटी पर आया था, तो कंपनी के रिकॉर्ड क्या कहते हैं? अगर उसके साथ मारपीट हुई थी, तो उसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई? उसे अस्पताल पहुंचाने के बाद उसके परिवार को सूचना देने और इलाज की जिम्मेदारी निभाने को लेकर क्या कदम उठाए गए?
ये सिर्फ फ्लिपकार्ट मिनट से जुड़े सवाल नहीं हैं, बल्कि पुलिस की जांच पर भी सवाल हैं। आखिर घटनास्थल और वहां मौजूद संभावित सबूतों की जांच कहां तक पहुंची? पुलिस को इस मामले में अब तक की कार्रवाई सार्वजनिक करनी चाहिए।
यहां मौजूद कई राइडर्स कैमरे पर बोलने से हिचकिचा रहे हैं। लेकिन वे चाहते हैं कि समीर को इंसाफ मिले और डिलीवरी करने वाले दूसरे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। उनकी चिंता रात में COD ऑर्डर के दौरान होने वाली परेशानियों को लेकर भी है।
सामान लोगों के घर तक पहुंचाने वाले ये डिलीवरी राइडर्स भी इंसान हैं। उनकी भी जिंदगी है, परिवार है, आत्मसम्मान है। उन्हें सिर्फ काम करने वाला कर्मचारी समझकर उनकी सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
समीर अब वापस नहीं आएगा। लेकिन उसके परिवार को इंसाफ मिलना चाहिए और उसकी मौत से जुड़े हर सवाल का जवाब मिलना चाहिए।
फ्लिपकार्ट मिनट को सामने आकर जवाब देना चाहिए। पुलिस को निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए। अगर किसी की लापरवाही या जिम्मेदारी से बचने की बात साबित होती है, तो कार्रवाई होनी चाहिए।
क्योंकि एक गरीब परिवार के बेटे की जिंदगी भी उतनी ही कीमती है, जितनी किसी और की।
डिलीवरी राइडर्स की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
@RahulGandhi@INCIndia@ShayarImran
#JusticeForSameer #SameerHussain #FlipkartMinutes #Gigworkers #DeliveryWorkers #WorkerSafety #Justice #Delhi
Can I ask you a favor? Don't stop talking about Palestine ،،
Do your humanitarian duty and don't ignore the matter.
These children deserve a better life.
Don't stay silent, at least share!!
https://t.co/cPitSGdW60
🚨Gazze'de açıklama yapan Avustralyalı kadın doktorlar:
▪️Bu videoyu çekiyoruz çünkü her an ölebiliriz.
▪️Hastalarımızın %70-80'i çocuk ve hamile kadınlar.
▪️9 aylık hamile, başı kesilmiş bir kadını doğurttum.
▪️Lütfen bu terör ve dehşeti durdurun.
❤️🩹Three-year-old Maryam Ghanem, the girl the world watched being carried out of a burning apartment in Gaza City at around 4am this morning, is now lying in Al-Shifa Hospital with second-degree burns. An Israeli occupation strike hit her family’s home while she slept, and she screamed as her mother burned to death in front of her. Her father was killed at the start of the genocide. Maryam is now an orphan, and her grandmother is all she has left. In this clip, the speaker asks what she did to deserve this, and says she survived only to bear witness against a world that has watched Gaza for three years and done nothing: witness to its betrayal, and to its silence. The Israeli occupation army has killed nearly 22,000 children in Gaza. “Speak up,” he says. “See us.”
ahmed_kaheel0 (IG)
Saleh used to cry as he reported the news, documenting scenes of bodies and wounded people under bombardment, carrying the pain and screams of the people to the world, hoping someone would listen and see what was happening in Gaza.
But the occupation killed Saleh, and the war has still not ended. The bombardment continues, blood continues to be shed, and journalists continue to pay with their lives for telling the truth.
Saleh is gone, but the tragedy he reported has not ended, and the war whose horrors he documented continues to claim more lives.
العثور قبل قليل على جثمان شاب من غزة، ارتقى خلال الحـ رب وهو ساجد، بعد أن ظل في عداد المفقودين طوال هذه المدة !!
أسأل الله أن يبعثه يوم القيامة ساجداً، وأن يحشره في زمرة الأنبياء والصالحين !!
“There are children crying inside the fire,” a volunteer screams.
A woman has been killed and three children wounded by Israeli bombing of an apartment in Gaza City..
🔥הלילה צה"ל ביצע פיגוע זוועות עולם בעזה.
טייס בלי מצפון או אלוהים הפציץ בניין בשכונת רימאל.
הבניין התלקח.
בתוך הבניין נשמעו קולות זעקה של אישה שנשרפה.
היא לא שרדה.
🔥את התינוק והילדה הצליחו אנשי ההצלה להוציא מתוך הלהבות.
הם הועברו חיים לשיפא.
⚠️הזהרה: סרטון קשה לצפיה
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (MDA) ने मुस्तफा मस्जिद को कथित अवैध निर्माण बताते हुए नोटिस जारी किया है। मस्जिद पर कार्रवाई के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने मोर्चा खोल दिया है। किसान यूनियन ने प्राधिकरण को चेतावनी दी है कि अगर मस्जिद पर कार्रवाई की गई तो इसका विरोध किया जाएगा और इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
नवादा में कुरआन की बे-हुरमती पर जताई चिंता, CM से निष्पक्ष जांच की मांग।
बिहार के नवादा में कुरआन शरीफ की कथित बे-हुरमती के मामले पर जमात रज़ा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान हसन खान ने चिंता जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
📍 नॉर्थ दिल्ली
यादव नगर निवासी समीर अपनी मां के साथ रहता है और ई-रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च उठाता है। हाल ही में उसका ई-रिक्शा चोरी हो गया। समीर ने खुद तलाश कर ई-रिक्शा और कथित चोर को पकड़ लिया और दोनों को लेकर थाने पहुंचा।
आरोप है कि चोरी की शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिसकर्मियों ने समीर के साथ ही बुरी तरह मारपीट की।
जिस युवक ने चोर पकड़कर पुलिस की मदद की, अगर उसी को थाने में इंसाफ़ के बजाय मार मिले, तो आम आदमी कानून पर भरोसा कैसे करे? मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।