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सत्य और निष्पक्षता की आवाज़ बुलंद करने वाले, मेरे घनिष्ठ मित्र और भारतीय श्रमजीवी पत्रकार महासंघ (IFWJ) बाड़मेर के जिलाध्यक्ष श्री महेंद्र सिंह जी मुनाबाव को जन्मदिवस की अनन्त शुभकामनाएं! ईश्वर आपको उत्तम स्वास्थ्य, लंबी आयु और पत्रकारिता के क्षेत्र में और अधिक ऊंचाइयां प्रदान करें। जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई! 🎂💐"@MahendraMunabao
@333maheshwariii Being educated does not require abandoning one's heritage. The veil is a symbol of grace and respect in Rajasthan’s tradition. We should appreciate the academic achievement of the RAS topper while also respecting the cultural identity his family chooses to uphold.
@the_kilanaut रविन्द्र सिंह भाटी को युवाओं ने इसलिए चुना है क्योंकि वो जमीन से जुड़े हैं, न कि किसी एक विचारधारा के ठेकेदार हैं। हर मुलाक़ात को पाखंड बताना पत्रकारिता नहीं, पूर्वाग्रह लगता है। असहमति ठीक है, लेकिन मर्यादा भी उतनी ही जरूरी है।
@Parihar_India@arvindchotia@MansaRajasthani घूंघट हो या बिना घूंघट — राजस्थानी संस्कृति में असली मान ‘संस्कार’ रो है। यहां रानियां भी रणभूमि की प्रेरणा रही हैं। हमारी परंपरा नारी को आदर देती है, उसे सीमित नहीं करती।
@JATbera1 कहानी दिल को छू गई। 16 घंटे मेहनत, ₹5000 तनख्वाह… और फिर भी चेहरे पर ‘संतोष’। सच में, असली अमीरी जेब में नहीं, सोच में होती है। ऐसे युवाओं का हौसला ही देश की ताकत है।
@Parihar_India@ShankarsinhBapu राजनीति में रिश्ते बदलते रहते हैं, लेकिन जो नेता जमीनी समीकरणों की गहराई समझता है, वही लंबे समय तक प्रासंगिक रहता है। राजनीति सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, उसकी समझ है।
@the_kilanaut सीमा पर रहने वालों के लिए लाइसेंसी हथियार की माँग गलत, लेकिन पत्रकार देशी कट्टा लेकर घूमे तो सही?
यह दोहरा मापदंड है। धन्यवाद नवनवीन पत्रकार साहब की सोच को।
@PRGBishnoii@RajPoliceHelp भगवान् जम्भेश्वर जी के 575 साल बीतने के बाद भी अगर आपकी आस्था है उनमें, तो आप 79 साल बाद महाराजा से कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। किसी समाज विशेष को इतना भी टारगेट मत करो। मुझे विश्वाश है कि संविधान की पहली पंक्ति we the people को अपने कभी नहीं पढ़ा होगा? तो कानून मत बताओ।
@ashokshera94 लोकतंत्र की रीढ़ की हड्डी संविधान की पहली पंक्ति ही, We the people of india, जिसको सबसे ज्यादा उल्टा कर के पढ़ने वाले आपके चाहता नेता जो कहते हो who the people कहने वाले से कभी सवाल मत करना।
वैसे जाहिल पत्रकार से क्या बात करना, जिन्होंने संविधान कभी पढ़ा भी ना हो
@KlBhati11@Kapil_Jyani_ इसमें कोई पीड़ित नहीं है, अगर आप मामले को देखे तो, रोड़ गलत है तो आप संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज करवाओ।
ना कि रोड़ तोड़ो अपना विरोध दर्ज करवाओ।
अगर थाने में बैठा राइटर आपकी Fir गलत लिखता है तो आप उच्च अधिकारी को शिकायत करोगे ना कि fir फाड़ेंगे।
@Kapil_Jyani_ आपके पूर्वजों और 363 लोगों के बलिदान को हमारा सादर नमन,
अगर आपने इतिहास का सही तरीके से अध्ययन किया है तो मालूम होगा, नहीं तो खोज लेना राजपूतों ने आपके इस तथाकथित समाज जो जिसमें सिर्फ राजपूत को छोड़कर कितने भी हैं, उनके लिए कितनी जाने गंवाई है।
@the_kilanaut जिनके पूर्वजों ने लगभग हजार वर्षों तक विदेशी आक्रांताओं के सामने डटकर खड़े रहकर इस भूमि और संस्कृति की रक्षा की, उन्हें हथियारों का महत्व समझाने की आवश्यकता नहीं होती। इतिहास और बलिदान से दूर खड़े लोग शौर्य की परंपरा को नहीं समझ सकते।
@dineshbohrabmr बल्कि जिम्मेदारी और सम्मान होते हैं।
जिन पूर्वजों ने लगभग हजार वर्षों तक विदेशी आक्रांताओं के सामने डटकर खड़े रहकर इस भूमि और संस्कृति की रक्षा की, उन्हें हथियारों का महत्व समझाने की आवश्यकता नहीं होती। इतिहास और बलिदान से दूर खड़े लोग शौर्य की परंपरा को नहीं समझ सकते।1/2
@dineshbohrabmr जिन्हें युद्ध सिर्फ़ किताबों में पढ़ने को मिला है, उन्हें रणभूमि का मर्म कैसे समझ आएगा। जिन पीढ़ियों ने इस देश और अपनी प्रजा की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर किया, जिनके लिए धर्म का अर्थ ही न्याय, शौर्य और संरक्षण रहा — वे जानते हैं कि अस्त्र-शस्त्र केवल साधन नहीं। 1/1
@the_kilanaut शिव विधानसभा के 300+ गांवों के लोगों ने सोच-समझकर अपना विधायक चुना है।
राजधानी के तथाकथित “एलिट क्लब” से अलग, यहाँ के लोगों की समझ और विचारधारा कहीं अधिक ज़मीनी और सक्षम है।
उन्हें भरोसा है कि उनका विधायक जो भी मांग करेगा, वह उनके सम्मान और अधिकार के लिए होगा — चाहे वह कुछ भी