नव कलियों के आने में ही, फूलों की हो जाती शादी, बाग़ों में यौवन आता ही, मिट्टी हो जाती है खाद। पलकों को भीगाने वालों, सुभ्र कपोल जलाने वालों, कुछ मुखड़ों के मिट जाने से, दर्पण नहीं मरा करता है।
कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है।
- गोपालदास नीरज
सपना क्या है, नयन सेज पर, सोया हुआ आँख का पानी, और टूटना है उसका ज्यों, जागे कच्ची नींद जवानी। गीली उमर बनाने वालों, डूबे बिना नहाने वालों, कुछ पानी के बह जाने से, सावन नहीं मरा करता है।
कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है।