@VivekGa54515036 अरे चाचा आप तो 2 ही कमेंट में डर गए डर गए इस बात से की आप एक failed बेरोजगार इंसान है जिसका काम दिन भर मेहनत और ईमानदारी से परीक्षा पास कर के अधिकारियों को बदनाम करना होता है क्योंकि आप खुद कुछ नही कर पाए तो वो सब को देख के आपके छाती में सांप लोटते रहता है।
Intervenor Petition का “Mega Merge Edition”😄
वकील Kumar Farsh और Rajesh Chuppi ने सोचा—नई मेहनत क्यों करें बाबू?
पुराने सारे documents उठाओ, एक PDF में Merge करो और नाम दे दो—Intervenor Petition! 😂📄
उधर चयनित अभ्यर्थियों ने भी हाथ जोड़कर कहा—
“बहुत-बहुत धन्यवाद बाबू! Rejoinder बनाते समय अब अलग-अलग कागज़ खोजने की मेहनत बच गई… पूरा syllabus एक ही PDF में मिल गया।” 😭😂
अब बस Ctrl+F, chronology निकालो और जवाब लिखो। 😏
इतनी सुविधा ......😂
#JPSC #jpscfso #jpsccdpo #11thto13thjpsc #jharkhand
एक सवाल बार-बार पूछे जाने की जरूरत है
व्यवस्था की गलती की सजा आखिर किसे मिल रही है?
JPSC में TDPL एजेंसी का चयन छात्रों ने नहीं किया था।
सरकार और आयोग की व्यवस्था ने किया था।
तो अगर एजेंसी में गड़बड़ी हुई, सवाल छात्रों की नौकरी पर क्यों?
सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कहाँ है?
JSSC-CGL परीक्षा ठीक ढंग से आयोजित कराने की जिम्मेदारी छात्रों की नहीं, JSSC की थी।
छात्रों ने न प्रश्नपत्र बनाया, न परीक्षा केंद्र चलाया, न निगरानी की, न परिणाम तैयार किया।
फिर गलती व्यवस्था की और नौकरी छात्रों की जाएगी?
JSSC के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही कौन तय करेगा?
जिन इंटरव्यू बोर्डों और प्रक्रियाओं पर सवाल उठे, उनमें सिर्फ अभ्यर्थी नहीं थे
अधिकारी, सदस्य और बोर्ड के जिम्मेदार लोग भी थे।
फिर हर सवाल का अंतिम निशाना वही छात्र क्यों, जिसने सिर्फ परीक्षा दी थी?
और सबसे बड़ा सवाल
जिन परीक्षाओं और प्रक्रियाओं को पहले सरकार और उसकी संस्थाओं ने वैध माना, परिणाम जारी किए, चयन किया और नियुक्तियां दीं, तब छात्रों ने नहीं बल्कि व्यवस्था ने उन्हें सही माना था।
आज वही व्यवस्था अपनी गलती का बोझ किसके कंधे पर डाल रही है?
उस लड़के के कंधे पर, जो लाइब्रेरी में बैठकर सिर्फ पढ़ रहा था।
उसने TDPL नहीं चुना।
उसने प्रश्नपत्र नहीं बनाया।
उसने परीक्षा की निगरानी नहीं की।
उसने परिणाम नहीं बनाया।
उसने नियुक्ति प्रक्रिया नहीं बनाई।
उसका अपराध बस इतना है कि उसने भरोसा किया कि सरकार की परीक्षा-व्यवस्था ईमानदार और विश्वसनीय होगी।
अगर व्यवस्था की गलती का भुगतान हमेशा अभ्यर्थी ही करेगा, तो फिर व्यवस्था चलाने वालों की जवाबदेही का अर्थ क्या है?
दोषी पर कार्रवाई होनी चाहिए
लेकिन निर्दोष की नौकरी छीनकर व्यवस्था को निर्दोष नहीं बनाया जा सकता।
सरकार से सवाल होना चाहिए, आयोगों से सवाल होना चाहिए, जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल होना चाहिए।
क्योंकि
जिसने परीक्षा कराई, उससे जवाबदेही मांगिए।
जिसने एजेंसी चुनी, उससे जवाबदेही मांगिए।
जिसने परिणाम जारी किया, उससे जवाबदेही मांगिए।
लेकिन जिसने सिर्फ परीक्षा दी,
उससे उसकी नौकरी का हिसाब मत मांगिए।
वरना यह न्याय की तलाश नहीं,
व्यवस्था की विफलता का बिल उस छात्र के हाथ में थमाना है, जिसका इस पूरी व्यवस्था में हस्तक्षेप शून्य था।
@JPSCreformanch@AdiwasiVoice@Jrkndikhurpench@HemantSorenJMM@yourBabulal@BJP4Jharkhand
खैर गर्दिशों में चल रहे हैं तारे अभी ,
फिर भी मांग नहीं रहे हैं सहारे अभी ,
यह घुटनों के बाल रेंगने वाले मुझ पर हंस रहे हैं ,
मेरी सोच से वाकिफ नहीं है बेचारे अभी...!!
बिन पेंदी का लोटा हर सुनवाई के बाद नई दिशा में लुढ़कता है—फैसला मन का हो तो जज निष्पक्ष और सरकार महान; उल्टा पड़े तो दोनों बेईमान!
बस एक सिद्धांत अटल है—कुछ भी हो, चंदा चाहिए, QR कोड अपनी जगह अटल रहेगा! 😆
लोटा भी फूटा है जनाब—चंदा कहाँ टिकता है, यह पूछना मना है! 😏
कभी आंदोलन की ओर, कभी चुनाव की ओर—इस लोटे का लुढ़कना जारी रहेगा .......(to be contd.).............,,,
#jssccgl #jpsc #jpscfso #jpsccdpo #jharkhand
वाह शर्मा जी
मतलब आपके हिसाब से न्याय क्या कहता है कि किसी मेहनती बेगुनाह की बलि चढ़ा कर भीड़ को खुश कर दें।
क्या आपके लिए मेहनत और ईमानदारी से चयनित छात्र का कोई मोल नहीं है।
वोट बैंक के लिए भीड़ का हिस्सा बन जाइए, वो गलत है या सही उसका ऑथेंटिसिटी से कोई मतलब नहीं।
गजबे हिपोक्रेसी है भाई।
JSSC CGL के चयनित अभ्यर्थियों ने रांची प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर अपनी बात रखी। अभ्यर्थियों ने कहा कि वे वर्तमान में नौकरी कर रहे हैं, लेकिन उन पर पैसे देकर नौकरी हासिल करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत और पढ़ाई के बाद परीक्षा पास की है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी मिले, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन बिना दोष साबित हुए सभी चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी रद्द करना उचित नहीं है।
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कोई कहता है "गेहुँ के साथ घुन भी पिसता है "
पर यहाँ तो थोड़ा सा घुन के लिए पूरा खलिहान ही जलाया जा रहा है।
600 लड़के ऐसे है जिन्होंने दूसरी केंद्रीय नौकरी तक छोड़ दी, सिर्फ इसलिए कि अपने राज्य, अपनी माटी की सेवा कर सके।
इसमें 600 ST भाई -बहन है जिन्होंने पहली बार अपने गांव में उम्मीद जगाई थी कि हम भी कुछ बन सकते है।
कहीं गड़बड़ी हुई है तो दोषी को सजा दो, और निर्दोषों को न्याय दो।
सत्य चाहे देर से आए पर जीतेगा तो मेहनत ही।
@HemantSorenJMM@JmmJharkhand@RahulGandhi@The_FollowUp@yourBabulal
#JSSC_CGL
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