💥 *कहानी का नाम:* *“मिट्टी की खुशबू”*--
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👉 *राजस्थान के छोटे से गाँव* *"लूणासर"* में जन्मी *रेवती* बचपन से ही मिट्टी से कुछ अलग रिश्ता महसूस करती थी। बाकी बच्चे जहाँ खेल में खोए रहते, *वह सूखी मिट्टी में नमी ढूँढती रहती* — *“जब धरती बोलती है, तो उसकी आवाज़ को सुनना चाहिए,” वह कहती।*
👉 लेकिन उसके घर की हालत ऐसी थी कि रोज़ *दो वक़्त का खाना मिलना भी मुश्किल था।* पिता खेतों में मजदूरी करते, माँ घरों में काम। पढ़ाई का तो सवाल ही नहीं था — *लेकिन रेवती की जिद अलग थी।*
👉 *वह रात में दूसरों के खेतों के पास जाकर मिट्टी की परतों को छूती,* उसके रंग और बनावट समझने की कोशिश करती। लोगों को लगता वह *पागल* है। एक दिन किसी ने मज़ाक उड़ाया —
*“अरे रेवती, मिट्टी से कौन पेट भरता है?”*
वह मुस्कुराई — *“जब लोग मिट्टी को छोड़ देंगे, मैं उसी से सबका पेट भरूँगी।”*
👉 समय बीता। रेवती ने गाँव के स्कूल में झाड़ू-पोंछा करने के बदले में पढ़ाई करने की इजाज़त ली। *दिन में काम, रात में पढ़ाई।* कई बार भूखी रह जाती, लेकिन *मिट्टी के सपनों को कभी सूखने नहीं दिया।*
👉 वक्त ने साथ तब दिया जब जिला विज्ञान मेले में उसने एक *“मिट्टी से पानी बचाने वाली ईको-क्ले”* बनाई — एक ऐसा मिश्रण जो *फसलों की जड़ों में नमी को लंबे समय तक बनाए रखता था।*
👉 लोग हँसे, लेकिन *एक बूढ़े किसान* ने उसे अपने खेत में आज़माने दिया। और जब फसल दोगुनी हुई — वही लोग जो उसे पागल कहते थे, अब उसे *“रेवती दी”* कहने लगे।
👉 आज रेवती *“मिट्टी की खुशबू”* नाम की अपनी कंपनी चलाती है, जो बंजर ज़मीनों को फिर से हरा करती है।
👉 उसकी *कंपनी हर उस बच्चे के नाम पर पौधा लगाती है* जिसने कभी गरीबी में पढ़ाई छोड़ी हो।
वह कहती है —
*“संघर्ष वो नहीं जो आपको गिरा दे,*
*संघर्ष वो है जो मिट्टी में गिरकर भी आपको उगना सिखा दे।”* 🔥🔥
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Spirituality = Inquiry 🤔🧐
"Spirituality is hard, unrelenting inquiry. It is philosophy with the purpose of liberation.
It is not a belief system."
~ Acharya Prashant
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Real courage 💪 = battling yourself ✅
"Real courage is found in battling yourself and knowing when to avoid unnecessary conflicts."
~ Acharya Prashant
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🪔*आज हुई हमारी दिवाली बोधस्थल वाली*🪔✨
ये एक ऐसी दिवाली थी जिस पर हम दोनों बहनें (जो साथ में दिख रहीं हैं) घर नही गए, बाहर से बाहर ही रह गए।
घरवालें - दिवाली पर घर नहीं आ रहे हो तुम दोनों,थोड़ा ज्यादा नहीं हो रहा है😡🤨
हमने बोला अभी तो पार्टी शुरू हुई है 🤩
मेरे तो घरवाले बहस करते करते ऐसे मोड़ पर आ जाते है बोलते है तुमसे बहस करना ही बेकार है , जाओ करो जो करना है।🤪
मम्मी कहती है खुद सुनती हो ठीक है पर और लोगों को(और बहनों को)तो मत बिगाड़ों।
हालांकि कल ही मैने अपनी एक और बहन को भी सत्र से जोड़ दिया है, आगामी सत्रों में हम तीन आने वाले हैं।
और उससे भी आगे और दो लोग को जोड़ने में सफल रहे तो शायद सभी पांचों बहन साथ में आएंगे सत्रों में।🥰
⭐⭐⭐⭐⭐
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🎗️ Truth Without Apology 🎗️
जब भी आप किसी अन्य की उपस्थिति में—चाहे वह व्यक्ति हो, वस्तु हो, या स्थिति—डर, कांपना, या यहां तक कि आशा भी महसूस करें, तो स्वयं को याद दिलाएं: *मैं यह सब केवल इसलिए महसूस कर रहा हूँ क्योंकि मैं निर्भर हो रहा हूँ। मुझे निर्भर नहीं होना चाहिए। मैं स्वतंत्र हूँ।*
--आचार्य जी
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ब्रेकिंग न्यूज़ 📢📢📢
दुनिया के शीर्ष पढ़े जाने वाले पुस्तक में शामिल आचार्य प्रशांत की Truth Without APOLOGY 🪔 .........
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Review by Purnansh ⭐️⭐️⭐️⭐️⭐️
“आचार्य प्रशांत ने Truth Without Apology पुस्तक में बताया है कि सच को कहने के लिए साहस चाहिए, और सच्चाई से जीने के लिए और भी अधिक। यह पुस्तक आत्म-जागरूकता की यात्रा की सच्ची साथी है।”
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I'm not a book reader person.
But nowadays, I just wait throughout the day for the time when I can grab a book —
especially when it comes to AP’s book 📙🖊️.
Thank you, Sir, for the wisdom.
You are more than my parents.
I love you so much, Sir. 🙏🩷
And I know — “thank you” means nothing until I show it through my life and my work.
I’m doing it, and I will.
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