यह वीडियो दिल को छू लेने वाला है।
पद्म पुरस्कारों को लेकर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन एक बात स्वीकार करनी होगी…..हाल के वर्षों में इन सम्मानों ने उन अनदेखे, गुमनाम नायकों तक पहुंच बनाई है जिन्होंने दशकों तक भारतीय संस्कृति और समाज की सेवा की, बिना किसी प्रचार-प्रसार के।
96 वर्षीय भीमव्वा डोड्डाबलप्पा शिल्लेक्यथारा इसका जीवंत उदाहरण हैं। कर्नाटक की पारंपरिक छाया-कठपुतली कला ‘तोगलु गोम्बेयाता’ को उन्होंने 70 वर्षों से अधिक समय तक जीवित रखा। रामायण-महाभारत की कथाओं से लेकर शिक्षा, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण जैसे सामाजिक संदेशों तक, उन्होंने अपनी कला को जनजागरण का माध्यम बनाया।
जब मनोरंजन की दुनिया सिनेमा और इंटरनेट तक सिमट गई, तब भी उन्होंने एक विलुप्तप्राय लोककला को बनाए रखा और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य किया।
ऐसे कलाकारों को पद्म सम्मान मिलना केवल उनका सम्मान नहीं, बल्कि भारत की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और उन अनसुने साधकों का सम्मान है जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सांस्कृतिक आत्मा को जीवित रखने में लगा दिया।
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भीषण गर्मी में AC (एयर कंडीशनर) के ठंडे कमरे से अचानक तेज धूप और भयंकर गर्मी में निकलने पर सिर घूमने या चक्कर आने जैसा महसूस होना एक बहुत ही आम समस्या है। विज्ञान की भाषा में इसे थर्मल शॉक (Thermal Shock) या शरीर का तापमान असंतुलित होना कहते हैं।
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सनातन धर्म में बताए गए 16 संस्कार मनुष्य के जीवन को जन्म से लेकर मृत्यु तक पवित्र, अनुशासित और आध्यात्मिक बनाने के लिए बनाए गए हैं। ये संस्कार व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और धार्मिक विकास का मार्गदर्शन करते हैं।
1. गर्भाधान संस्कार
यह पहला संस्कार है।
इसका उद्देश्य श्रेष्ठ संतान प्राप्ति के लिए पवित्र संकल्प लेना होता है। पति-पत्नी ईश्वर से योग्य और संस्कारी संतान की प्रार्थना करते हैं।
2. पुंसवन संस्कार
गर्भ धारण के बाद किया जाता है।
इस संस्कार का उद्देश्य गर्भस्थ शिशु के अच्छे स्वास्थ्य, मानसिक विकास और सुरक्षा की कामना करना है।
3. सीमन्तोन्नयन संस्कार
गर्भवती महिला और शिशु की रक्षा के लिए किया जाने वाला संस्कार।
इसमें माता को मानसिक शांति, सकारात्मक विचार और शुभ आशीर्वाद दिए जाते हैं।
4. जातकर्म संस्कार
शिशु के जन्म के तुरंत बाद किया जाता है।
इसमें नवजात को मधु-घृत चटाकर ईश्वर का स्मरण कराया जाता है और शुभ मंत्र बोले जाते हैं।
5. नामकरण संस्कार
शिशु का शुभ नाम रखने का संस्कार।
नाम ऐसा रखा जाता है जो सकारात्मक अर्थ वाला और प्रेरणादायक हो।
6. निष्क्रमण संस्कार
जब शिशु पहली बार घर से बाहर जाता है।
उसे सूर्य, चंद्रमा और प्रकृति के दर्शन कराए जाते हैं ताकि वह संसार से परिचित हो सके।
7. अन्नप्राशन संस्कार
शिशु को पहली बार अन्न खिलाने का संस्कार।
आमतौर पर 6 महीने के बाद बच्चे को खीर या अन्न ग्रहण कराया जाता है।
8. चूड़ाकर्म (मुंडन) संस्कार
बालक के प्रथम बाल उतारे जाते हैं।
मान्यता है कि इससे शुद्धि, स्वास्थ्य और बुद्धि का विकास होता है।
9. कर्णवेध संस्कार
कान छेदन का संस्कार।
यह स्वास्थ्य, सौंदर्य और ऊर्जा संतुलन से जुड़ा माना जाता है।
10. विद्यारंभ संस्कार
शिक्षा प्रारंभ करने का संस्कार।
बच्चे को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है और माँ सरस्वती की पूजा होती है।
11. उपनयन संस्कार
इसे जनेऊ संस्कार भी कहते हैं।
यह बालक के आध्यात्मिक और अनुशासित जीवन की शुरुआत मानी जाती है। इसमें गायत्री मंत्र का उपदेश दिया जाता है।
12. वेदारंभ संस्कार
वेदों और शास्त्रों के अध्ययन का आरंभ।
इस संस्कार का उद्देश्य ज्ञान, धर्म और सत्य की शिक्षा प्राप्त करना है।
13. केशांत संस्कार
शिक्षा के अंतिम चरण का प्रतीक संस्कार।
इसमें विद्यार्थी संयम और जिम्मेदारी के साथ जीवन के अगले चरण के लिए तैयार होता है।
14. समावर्तन संस्कार
गुरुकुल शिक्षा पूर्ण होने के बाद किया जाता है।
विद्यार्थी गुरु से आशीर्वाद लेकर गृहस्थ जीवन में प्रवेश की तैयारी करता है।
15. विवाह संस्कार
गृहस्थ जीवन में प्रवेश का पवित्र संस्कार।
पति-पत्नी धर्म, प्रेम, जिम्मेदारी और परिवार निर्माण का संकल्प लेते हैं।
16. अन्त्येष्टि संस्कार
जीवन का अंतिम संस्कार।
यह शरीर को पंचतत्व में विलीन करने और आत्मा की शांति के लिए किया जाता है।
सनातन धर्म में 16 संस्कारों का महत्व
जीवन को अनुशासित और पवित्र बनाते हैं
नैतिक और आध्यात्मिक विकास करते हैं
परिवार और समाज में संस्कारों की परंपरा बनाए रखते हैं
व्यक्ति को धर्म, कर्तव्य और सदाचार का मार्ग दिखाते हैं
जन्म से मृत्यु तक जीवन को अर्थपूर्ण बनाते हैं
संस्कारों से ही श्रेष्ठ चरित्र, श्रेष्ठ समाज और श्रेष्ठ राष्ट्र का निर्माण होता है।
सच्चा ज्ञान देश, समाज और समस्त मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। इसलिए यह जरूरी है कि हमारा ज्ञान और हमारे कर्म पूरी मानवता के लिए प्रेरणा बनें।
आत्मा शुद्धः सदा नित्यः सुखरूपः स्वयम्प्रभः।
अज्ञानान्मलिनो भाति ज्ञानाच्छुद्धो भवत्ययम्।।
भारतीय रसोई की पहचान और औषधीय गुणों से भरपूर तेजपत्ता न केवल खाने का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि हमारे बेहतर स्वास्थ्य का भी आधार है। पाचन क्रिया को सुदृढ़ करने से लेकर ब्लड शुगर और सूजन को नियंत्रित रखने में यह लाभकारी माना जाता है। आइए, प्रकृति के इस अनमोल उपहार को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
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स्वस्थ जीवन की शुरुआत बड़े बदलावों से नहीं, छोटी अच्छी आदतों से होती है।
सही खानपान, नियमित गतिविधि और संतुलित जीवनशैली अपनाकर मोटापे को नियंत्रित करना संभव है।
आज से खुद के बेहतर और स्वस्थ संस्करण की ओर कदम बढ़ाइए।
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To mark the 25th Day of the countdown to International Day of Yoga 2026, a special Yoga session is scheduled to be organized. Let us come together to experience health, harmony, and wellness within the serene and historic surroundings of our cultural heritage.
🗓️ Date: 27 May 2026
📍 Venue: Western Group of Temples, Khajuraho, Madhya Pradesh
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The Mahabharata begins with a dog being beaten for no reason.
It ends with a dog walking a king to the gates of heaven.
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