🇮🇳 Modi Government just SOLD #IDBIBank to a Canadian company.
The bank made ₹9,500 Cr profit last year | Why sell a bank that is finally making money?
🇨🇦 Buyer : Fairfax Financial, Canada
Deal: ₹52,878 Cr for 60.72% stake at ₹81 per share
IDBI Bank net profit:
FY24 : ₹5,634 Cr
FY25 : ₹7,515 Cr
FY26 : ₹9,513 Cr (highest ever)
Q1 FY27 : ₹2,115 Cr
✅ Net NPA just 0.15%
✅ Profit grew nearly 70% in two years
The bank that once needed a rescue from LIC is now earning close to ₹10,000 Cr a year | And control has gone to Fairfax at roughly 9x annual earnings
Government and LIC will still hold 34% combined.
IDBI बैंक बिक गया, और ये बात राहुल गाँधी जी ने एक साल पहले ही बता दी थी।
IDBI के कर्मचारी राहुल की पोस्ट पर पूरी ज़िंदगी का पट्टा लिखवाने को तैयार हैं अगर वे उसे बचा लें, पर ये बर्बादी तो उन्होंने ख़ुद ही लिखी है न अपनी तकदीर में?
उनमें से कई को हिंदू राष्ट्र चाहिए होगा। भगतो ?
इतिहास से सबक: Hindustan Zinc की कहानी, और IDBI पर उठते सवाल
आजकल IDBI बैंक की बिक्री के पक्ष में एक उदाहरण बहुत दिया जा रहा है, Hindustan Zinc का। कहा जाता है कि देखिए, 2002 में सरकार ने इसे बेचा और कंपनी कितनी आगे बढ़ गई। कंपनी आगे बढ़ी, ये सच है। पर कहानी का दूसरा हिस्सा कम लोग बताते हैं।
मार्च 2002 में सरकार ने Hindustan Zinc की 26% हिस्सेदारी Sterlite (आज का वेदांता समूह) को बेची। इसके करीब बीस साल बाद, 18 नवंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उस बिक्री में गड़बड़ी का प्रथम दृष्टया मामला बनता है। कोर्ट ने CBI को regular case दर्ज करके पूरी जाँच करने और हर तिमाही स्टेटस रिपोर्ट देने का आदेश दिया। 2022 में केंद्र सरकार ने खुद कोर्ट को बताया कि CBI ने FIR दर्ज कर ली है।
कोर्ट के सामने जो बातें आईं, वो ध्यान देने लायक हैं। सवाल उठे कि 25% की जगह 26% हिस्सा बेचने का फ़ैसला क्यों हुआ, बोली की प्रक्रिया कैसी रही, और 26% हिस्से का मूल्यांकन कैसे हुआ।
रिपोर्टों के अनुसार strategic sale में asset valuation method इस्तेमाल नहीं हुआ, जबकि Disinvestment Commission ने इसकी सलाह दी थी।
एक और बात। सरकार ने जो करीब 30% हिस्सा अपने पास रखा, उस पर इतना dividend आता है कि सरकार अब बाकी हिस्सा बेचने में जल्दबाज़ी नहीं कर रही। बिक्री के समर्थक भी मानते हैं कि जितने में बेचा था, उससे ज़्यादा सरकार dividend में ले चुकी है। यानी कमाऊ संपत्ति का सही दाम लगाना कितना ज़रूरी है, ये इसी उदाहरण से समझ आता है।
अब IDBI पर आइए।
इस बार सरकार कह रही है कि दो independent valuers लगाए गए, और एक ने asset valuation method भी अपनाया। ये अच्छी बात है, और इसे मानना चाहिए।
Hindustan Zinc से सबक लिया गया है तो उसकी तारीफ़ होनी चाहिए।
पर सबक का दूसरा हिस्सा अभी अधूरा है: पारदर्शिता। वो valuation report आज तक सार्वजनिक नहीं है। बैंक की ज़मीनों और इमारतों की कीमत कितनी आँकी गई, कोई नहीं जानता। Hindustan Zinc का मामला 20 साल बाद अदालत में खुला। क्या हम चाहते हैं कि IDBI के सवाल भी 2046 में किसी अदालत में खुलें?
कबीर ने सही कहा था,
काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥
अभी कोई binding agreement साइन नहीं हुआ है। RBI की मंज़ूरी बाकी है। सवाल पूछने का सही वक्त अभी है, बाद में नहीं।
और जो लोग कहते हैं कि सवाल पूछना विकास का विरोध है, उनके लिए भी कबीर की एक बात,
निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय॥
सवाल पूछने वाला दुश्मन नहीं होता, वो व्यवस्था को साफ़ रखता है।
IDBI की पूरी valuation report सार्वजनिक की जाए। संविधान का अनुच्छेद 14 कहता है कि राज्य का कोई फ़ैसला मनमाना न हो। जनता की संपत्ति का हिसाब जनता को मिलना उसका हक़ है।
सत्यमेव जयते।
#IDBINotForSale #SaveIDBI
Selling control of a bank with ₹3.5 lakh crore public deposits after promising Parliament it would stay majority government-owned is wrong. National assets are not for sale at a discount.
#IDBINotForSale#DoNotSellIDBI
“Friends, notice the final post @RtiCell15796
shared tagging @yadavakhilesh
before the account was suspended. It raises a serious question: is @elonmusk
quietly enabling the current government’s crackdown on free speech in exchange for Starlink licence approval?
Post no.231 #IDBINotForSale
WE, THE EMPLOYEES OF IDBI BANK, OPPOSE PRIVATISATION!
IDBI Bank is not just a financial institution,it is our livelihood, our professional identity, and a legacy built through decades of dedicated service
Modi's Masterstroke🔥 or HitWicket💀
Privatization of IDBI Bank will be ending Reservation on 12,000 future vacancies. Bold decision or Miss-timed before UP & Punjab Elections which are reservation sensitive states.
मोदी सरकार के राज में देश की महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने का सिलसिला लगातार जारी है! कभी देश की संपत्तियों को न बेचने का दावा करने वाली भाजपा सरकार आज उन्हीं संपत्तियों के निजीकरण में जुटी है। अब IDBI बैंक भी सरकार के निशाने पर है, जिसके विनिवेश के फैसले ने बैंक कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है।
सरकार के इस फैसले के विरोध में IDBI बैंक के कर्मचारी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि IDBI बैंक सिर्फ एक वित्तीय संस्थान नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका, कर्मचारियों की पेशेवर पहचान और दशकों की समर्पित सेवा से निर्मित एक विरासत है।
बैंक कर्मचारियों की मेहनत, समर्पण और वर्षों के योगदान से खड़ी हुई इस संस्था के भविष्य को केवल मुनाफे और निजीकरण के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ कमाना नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देना और आम जनता के हितों की रक्षा करना भी है।
देश की संपत्तियों को बेचकर अपनी जिम्मेदारियों से बचना समाधान नहीं है! मोदी सरकार को कर्मचारियों की आवाज़ सुननी चाहिए और IDBI बैंक की सार्वजनिक पहचान, कर्मचारियों के हितों तथा देश की इस महत्वपूर्ण वित्तीय विरासत की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
#SaveIDBIBank
Reserve price for IDBI Bank lowered from Rs 70,000 crore to Rs 53,000 cr
IDBI Bank's fixed assets of Rs 30,000 cr undervalued at Rs 8,880 cr
At deal price of Rs 53,000 cr, buyer will get windfall of Rs 54,119 cr
Extraordinary charges in Sep 9 letter to @SecyDIPAM by @aiboc_in@FinMinIndia can you please clarify on these charges?
LIC ne 2019 mein ₹21,624 करोड़ लगाकर IDBI बैंक को डूबने से बचाया। वजह सिर्फ़ निवेश नहीं थी। LIC के दो-दो चेयरमैन कह चुके हैं कि IDBI बैंक उनका नंबर एक bancassurance partner है, यानी LIC की पॉलिसियाँ बेचने वाला सबसे भरोसेमंद बैंक।
अब कहानी में मोड़ देखिए।
Fairfax ने IDBI खरीदने के साथ ऐलान किया है कि वो अपनी Go Digit Life Insurance और Go Digit General Insurance की पूरी हिस्सेदारी IDBI बैंक में डालेगा। Prem Watsa खुद कह रहे हैं कि IDBI बैंक अब Digit के insurance products बेचेगा।
मतलब जिस बैंक को LIC के पॉलिसीधारकों के पैसे से बचाया गया, उसकी शाखाएँ अब LIC की ही प्रतिस्पर्धी कंपनी का काउंटर बनेंगी। और LIC उसी बैंक में 19% की "माइनॉरिटी" शेयरधारक बनकर बैठी देखती रहेगी।
रहीम ने कहा था,
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय॥
कुछ सीधे सवाल हैं:
Digit को "market price" पर IDBI में डाला जाएगा, तो बदले में IDBI क्या देगा? नए शेयर दिए गए तो सरकार के 15% और LIC के 19% का क्या होगा?
क्या LIC ने ये बिक्री मंज़ूर करने से पहले अपने bancassurance कारोबार पर असर का हिसाब लगाया? वो हिसाब पॉलिसीधारकों के सामने है?
कौटिल्य ने अर्थशास्त्र में लिखा, कोशपूर्वाः सर्वारम्भाः। हर काम खज़ाने से शुरू होता है, इसलिए पहले खज़ाने की परवाह करो। LIC का खज़ाना करोड़ों आम परिवारों की बचत है।
अभी कोई binding agreement साइन नहीं हुआ है। RBI, SEBI और IRDAI की मंज़ूरी बाकी है।
जवाब अभी माँगे जा सकते हैं।
1964 में जवाहरलाल नेहरू जी द्वारा स्थापित IDBI Bank जिसके शेयर 90Rs के थे उसे 81Rs के भाव से उस विदेशी कम्पनी को बेच दिया जिसके ऊपर पहले इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप लग चुके हैं!
लाभ कमाने वाली, सरकार को कमाई देने वाली देश की सम्पत्ति को विदेशियों के हवाले कर दिया!
जश्न मनाओ भारत वासियों और इसको ऑस्कर पुरस्कार देदो
#saveidbi #IDBIBank
@Da___Engineer@Nir0909@dinesh309@RajeshkumarSTo4@tonyJatinder9@IdbiFor@idesibanda@saveidbibank64